रायपुर के 83 वर्षीय जागेश्वर प्रसाद अवधिया पिछले कई दशकों से न्याय और अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वर्ष 1986 में केवल 100 रुपये की रिश्वत के झूठे आरोप में निलंबित हुए अवधिया छह वर्षों तक नौकरी से दूर रहे और प्रमोशन से लेकर इंक्रीमेंट तक सारी सुविधाएँ बंद हो गईं।
