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Wednesday, March 12, 2025

2 साल में एडिट हुई अक्षय कुमार की ‘OMG 2’:VFX के कारण तुंबाड 6 साल में बनी, जानिए फिल्मों के पोस्ट प्रोडक्शन की प्रोसेस

फिल्म मेकिंग में सबसे अहम पार्ट होता है पोस्ट-प्रोडक्शन का। इस स्टेज में फिल्म की एडिटिंग, डबिंग, साउंड मिक्सिंग और VFX जैसी चीजों पर काम होता है। इस पोस्ट प्रोडक्शन के सरताज को फिल्म एडिटर कहते हैं। एक्टर, डायरेक्टर के बाद एडिटर ही होता है, जो फिल्म को सही दिशा देता है। रील टु रियल के इस एपिसोड में पोस्ट-प्रोडक्शन की प्रोसेस को समझने के लिए हमने फिल्म एडिटर सुवीर नाथ और डायरेक्टर करण गुलियानी से बात की। इन्होंने बताया कि एक फिल्म को एडिट करने में 4 से 6 महीने का वक्त लगता है। हालांकि, फिल्म OMG 2 को एडिट करने में 2 साल का वक्त लगा। वहीं, पोस्ट प्रोडक्शन के दौरान बहुत सारे चैलेंज भी फेस करने पड़ते हैं। रीशूट और सेंसर बोर्ड की वजह से अक्सर पोस्ट-प्रोडक्शन में देरी हो जाती है, जिस कारण फिल्म का बजट काफी बढ़ जाता है। फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन में सबसे मेजर रोल एडिटर का होता है। फिल्म की एडिटिंग शुरू होने से पहले एडिटर और डायरेक्टर की मीटिंग होती है। इस मीटिंग में डायरेक्टर अपने विजन को बताता है। डायरेक्टर के विजन को समझने के बाद एडिटर, एडिटिंग शुरू करता है। कहानी को सही दिशा देने का काम फिल्म एडिटर का
एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के अलावा फिल्म को सही दिशा देने में फिल्म एडिटर का भी मेजर रोल होता है। इस बारे में फिल्म एडिटर सुवीर नाथ कहते हैं- मेरा मानना है कि फिल्म अपना असली रूप एडिटिंग टेबल पर ही लेती है। समझिए, एक राइटर अपने विजन के साथ फिल्म की कहानी लिखता है। फिर डायरेक्टर अपने विजन के साथ उसे डायरेक्ट करता है, लेकिन जब फुटेज एडिटर के पास आती है, तो कभी-कभार उसकी क्वालिटी हर एंगल में बेहतर होती है, तो कभी-कभार क्वालिटी बहुत ही खराब। ऐसे में फिल्म एडिटर के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। फिर यह हमारी जिम्मेदारी हो जाती है कि उसी फुटेज में से हम बेहतर निकाल सकें। एडिटर ही डिसाइड करता है कि फिल्म में कौन सा शॉट कहां, कब और कैसे आएगा। हम यह कह सकते हैं कि एक एडिटर एक्टर-डायरेक्टर की मेहनत को बेहतर बना सकता है और खराब भी कर सकता है। 4-5 दिन में सेंसर बोर्ड के निर्देश के हिसाब से फिल्म OMG 2 में बदलाव हुए
सुवीर नाथ ने फिल्म OMG 2 की एडिटिंग की है। इस प्रोजेक्ट में काम करने के एक्सपीरिएंस के बारे में उन्होंने कहा- इस प्रोजेक्ट में काम करना बहुत चैलेंजिंग था। दरअसल, फिल्म की कहानी ही हटकर थी। इसमें सेक्स एजुकेशन को रिलिजन के साथ जोड़ा गया था। आमतौर पर इंडियंस धर्म के नाम पर सचेत होते हैं। आखिरकार थोड़ी-बहुत कॉन्ट्रोवर्सी हुई। राइटर के जैसे ही मेरे पास यह चैलेंज था कि फिल्म सेंसिटिव लगे, लेकिन फूहड़ न लगे। हालांकि, सबसे बड़ा चैलेंज तब आया, जब सेंसर बोर्ड की तरफ से कई बदलाव के निर्देश दिए गए। इन बदलाव के साथ फिल्म के इमोशन और गरिमा को बरकरार रखना, मेरे लिए बहुत मुश्किल था। सेंसर बोर्ड के निर्देश और रिलीज के बीच सिर्फ 10 दिन का फासला था। मगर रियलिटी में मेरे पास सिर्फ 4-5 दिन थे। खैर किसी तरह यह काम पूरा हुआ। 2 साल में एडिट हुई थी अक्षय कुमार की फिल्म OMG 2
सुवीर नाथ ने बताया कि एक फिल्म को एडिट करने में अमूमन 4 महीने से ज्यादा का समय लगता है। वहीं उन्हें फिल्म OMG 2 को एडिट करने में 2 साल का वक्त लगा था। रीशूट्स की वजह से पोस्ट-प्रोडक्शन के काम में देरी होती है
सुवीर नाथ ने बताया कि ऐसा कई बार होता है कि पूरी शूटिंग खत्म हो जाने के बाद फिल्म के कुछ हिस्से की शूटिंग दोबारा करनी पड़ती है। साउंड क्वालिटी या फुटेज क्वालिटी जैसी वजहों के कारण ऐसा करना पड़ता है। जैसे कि वेब सीरीज द फैमिली मैन के पहले सीजन के कुछ सीन्स रीशूट किए गए थे। एडिटिंग के दौरान इन सीन्स में सुधार की जरूरत महसूस हुई। ऐसे में इन सीन्स को रीशूट किया गया, ताकि कहानी सही तरीके से आगे बढ़े और किरदारों का डेवलपमेंट सही दिखे। ये रीशूट क्वालिटी को बेहतर करने के लिए किए गए थे, लेकिन इसके कारण शूटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन का शेड्यूल प्रभावित हुआ। फुटेज चोरी करने पर प्रोड्यूसर लेते हैं एक्शन
करण गुलियानी ने नयनतारा और धनुष के विवाद पर बात की। उन्होंने इस विवाद का उदाहरण देते हुए समझाया- फिल्म में इस्तेमाल हुए हर शॉट, म्यूजिक और ट्यून का राइट प्रोड्यूसर के पास होता है। यहां तक कि जो फुटेज फिल्म की एडिटिंग के बाद बच जाते हैं, उनके राइट्स भी प्रोड्यूसर के पास होते हैं। अगर कोई प्रोड्यूसर के परमिशन के बिना उन फुटेजेस का इस्तेमाल करता है, तो प्रोड्यूसर उन पर चोरी का आरोप लगा सकते हैं। हालांकि, जिस तरह 3 सेकेंड के विजुअल पर नयनतारा और धनुष के बीच विवाद हो रहा है, वो होना तो नहीं चाहिए था। हिंदी हो या तमिल, हर फिल्म की डबिंग अलग होती है
फिल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन में डबिंग का भी अहम रोल है। आमतौर पर देखते हैं कि जो हॉलीवुड या साउथ की मूवीज होती हैं, उन्हें हिंदी ऑडियंस के लिए हिंदी भाषा में डब किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि जो हिंदी भाषा की फिल्म हम देखते हैं, वो भी डब्ड होती हैं। मतलब, फिल्म चाहे किसी भी भाषा की हो, एडिटिंग के बाद उसके लिए डबिंग जरूर होगी। अब सवाल यह है कि हिंदी फिल्मों को हिंदी में या तमिल फिल्मों को तमिल में डब क्यों किया जाता है। दरअसल, जब फिल्म की शूटिंग होती है, तब एक्टर्स की आवाज के अलावा आस-पास की आवाज भी कैमरे और माइक में रिकॉर्ड हो जाती हैं। जो फाइनल आउटपुट के दौरान बिना मतलब की होती हैं और सीन को खराब भी करती हैं। इस वजह से साउंड क्लैरिटी के लिए पूरी शूटिंग हो जाने के बाद ओरिजिनल साउंड को म्यूट कर दिया जाता है। फिर सीन के हिसाब से एक्टर्स अपनी आवाज की डबिंग करते हैं। इसके बाद आसपास की आवाज को फोली साउंड से क्रिएट किया जाता है। पोस्ट प्रोडक्शन में देरी की वजह से 6 साल में बनी तुंबाड
फिल्म तुंबाड के पोस्ट प्रोडक्शन में VFX और साउंड डिजाइन पर बहुत समय लगा था। इस कारण फिल्म की रिलीज में देरी हुई थी। फिल्म की शूटिंग 2012 में शुरू हुई थी। इस वक्त प्रोस्थेटिक मेकअप का इस्तेमाल किया गया, लेकिन यह सक्सेसफुल नहीं रहा। इसके बाद 2015 में दूसरी तरकीब का भी इस्तेमाल किया गया, लेकिन वह भी फेल हो गई। आखिर में फिल्म के राक्षस (हस्तर) को दिखाने के लिए VFX का इस्तेमाल किया गया, जिसके चलते और देरी हुई। इस प्रोसेस में जंगल और राक्षस के सीन्स को बनाने में बहुत वक्त लगा। हालांकि जब फिल्म 2018 में रिलीज हुई तो दर्शकों ने बहुत पसंद किया। ……………………………………………………………………………… बॉलीवुड से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें.. ‘फोटो भेजो, निहारना चाहता हूं’:भास्कर के पास शरद कपूर की रिकॉर्डिंग; पीड़िता के वकील का सवाल- गिरफ्तारी कब निक भास्कर के हाथ कुछ कथित ऑडियोज और स्क्रीनशॉट लगे हैं। ऑडियो में शरद कपूर महिला से फोटोज की डिमांड कर रहे हैं, साथ ही उसकी बॉडी के बारे में आपत्तिजनक कमेंट भी कर रहे हैं। उन्होंने महिला को भद्दी-भद्दी गालियां भी दीं। पूरी खबर पढ़ें..

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