वर्षा ने खुद ही शोर मचाया और मायरा-मायरा चिल्लाने लगी। उसने अविनाश को बाहर निकाला और परेशान होकर बच्ची को इधर उधर ढूंढने लगी। रहवासी भी एकत्र हो गए। उन्होंने हौज में देखने का बोला तो वर्षा ने कहा इतना भारी ढक्कन उठा कर वह कैसे गिरेगी। उसने हौज खोलने से मना कर दिया। इस पर लोगों को उसी पर शक हो गया और वर्षा की पोल खुल गई।
