गांव से 20KM दूर दफनाना होगा पादरी का शव:सुप्रीम कोर्ट के जजों की अलग-अलग राय के बाद फैसला; बस्तर में 20 दिन से मॉर्चुरी में शव

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बस्तर में 20 दिन से मॉर्चुरी में रखे पादरी के शव को गांव से 20 किलोमीटर दूर ईसाई कब्रिस्तान में दफनाना होगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 2 जजों की अलग-अलग राय के बाद सुनाया है। दरअसल, मृतक पादरी के बेटे उन्हें गांव में ही दफनाना चाहते थे लेकिन गांव में इसे लेकर विवाद की स्थिति बन गई। दरभा ब्लॉक के छिंदावाड़ा के पादरी सुभाष बघेल की मौत 7 जनवरी को हुई थी। इसके बाद से उनकी लाश जगदलपुर मेडिकल कॉलेज के मॉर्च्युरी में रखी है। उनके बेटे रमेश बघेल ने गांव में या निजी जमीन शव दफनाने के लिए हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। शव दफनाने के को लेकर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लगातार चल रही थी। इस बीच दो जजों की राय ही अलग-अलग आई। जस्टिस नागरत्ना का कहना है कि, शव को निजी जमीन में दफनाना चाहिए। जबकि जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि, 20-25 किमी दूर ईसाई समुदाय का अलग से कब्रिस्तान है। वहां शव दफन किया जाए। अंतिम आदेश में कोर्ट ने क्या कहा ? अलग-अलग राय के बाद भी हालांकि दोनों जजों ने तीन जजों की बेंच के गठन के लिए मामले को नहीं भेजा। संवेदनशील मामले को देखते हुए अंतिम फैसला अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया। इस अंतिम आदेश में कोर्ट ने कहा कि, अपीलकर्ता के पिता का शव पिछले तीन सप्ताह से शवगृह में रखा हुआ है ऐसे में हम तीसरे न्यायधीश की पीठ को नहीं भेजना चाहते हैं। मृतक के परिवार के लिए 20 किलोमीटर दूर स्थित कब्रिस्तान में स्थान तय किया जाए। साथ ही शव को शवगृह से ले जाने और दफनाने के लिए सभी परिवहन की व्यवस्था की जाए। अब जानिए 2 अलग-अलग राय में क्या-क्या कहा गयाजस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा- ग्राम पंचायत की तरफ से ईसाई समुदाय के लिए कोई स्थान चिन्हित नहीं किया गया है। इसलिए अपीलकर्ता के पास अंतिम विकल्प अपनी निजी भूमि है। हाईकोर्ट को ग्राम पंचायत को निर्देश देकर अपीलकर्ता की तकलीफ को समझना था। ताकि, उसकी निजी भूमि में शव दफनाने की अनुमति मिले। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा- CG पंचायत नियमों के अनुसार केवल चिन्हित स्थानों पर शव दफनाने की अनुमति दी जा सकती है। इसलिए कोई भी व्यक्ति शव दफनाने को लेकर अपनी पसंद का स्थान नहीं मांग सकता। जानिए क्या है पूरा मामला बता दें कि, बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक के छिंदावाड़ा गांव के रहने वाले पादरी सुभाष बघेल (65 साल) की 7 जनवरी 2025 को किसी बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। इसके बाद गांव में उनके शव दफनाने को लेकर बवाल हो गया था। वहीं उनके बेटे रमेश बघेल ने शव को जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज में मॉर्च्युरी में रखवा दिया था। विवाद बढ़ता देख उस समय मौके पर पुलिस फोर्स समेत प्रशासन के अधिकारी भी पहुंच गए थे। इसके बाद बेटे ने अपने पिता के शव को गांव में ही दफनाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट के वकील रोहित शर्मा ने बताया कि, सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिजन को कड़कापाल के कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार करने का निर्देश दिया है। वहीं राज्य को भी निर्देश दिया है कि, दोनों गांव में शांति बनाने के लिए उचित व्यवस्था करें। ————————– इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… गांववाले बोले- ईसाई को दफनाने नहीं देंगे: बस्तर में 13 दिन से रखा पादरी का शव, SC बोला- सरकार-हाईकोर्ट समाधान नहीं कर पाए, ये दुखद सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक व्यक्ति ने अपने पिता को दफनाने के लिए याचिका लगाई। जिसमें बताया कि उसके पिता सुभाष पादरी थे। 7 जनवरी को बीमारी के कारण उनका निधन हो गया था। बस्तर के दरभा गांव के कब्रिस्तान में वह पिता का शव दफनाना चाहते हैं, लेकिन ग्रामीण ऐसा नहीं करने दे रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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