रायपुर के पंडरी के मितान विहार में चंगाई सभा में धर्मांतरण और हिंदू देवी-देवताओं के अपमान पर जमकर बवाल हुआ। दावा है कि चंगाई सभा में 4 हिंदू परिवारों का धर्मांतरण कराया जा रहा था, लेकिन उसके पहले ही बजरंग दल और RSS के कार्यकर्ताओं ने हंगामा कर दिया। मोवा थाने में दर्ज FIR के मुताबिक पादरी कीर्ति केशरवानी और उसके सहयोगी हिंदू देवी-देवताओं को ईसा मसीह से छोटा बता रहे थे। यीशु मसीह की शरण में आने पर दुख दूर होने की बात कह रहे थे। ये सब पादरी के किराए के मकान में चल रहा था। पुलिस ने 3 लोगों को अरेस्ट किया है, लेकिन एक को छोड़ दिया। इस पर अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि धर्मांतरण-मतांतरण विदेशी षड्यंत्र है। ये सांस्कृतिक आतंकवाद है। इसे जल्द काबू करना चाहिए। वहीं छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने इसे साजिश बताया। उन्होंने कहा कि समाज को डराने की कोशिश की जा रही है। विस्तार से पढ़िए धर्मांतरण और बवाल पर ये रिपोर्ट… जहां विवाद हुआ, वहां पहुंचा भास्कर दैनिक भास्कर की टीम ने मितान विहार काॅलोनी के जिस मकान के बाहर विवाद हुआ, वहां पर जाकर छानबीन की। पादरी कीर्ति केशरवानी के मकान से कुछ दूरी पर रहने वाले स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस मकान में बीते कई साल से अस्थाई चर्च चल रहा है। उन्होंने बताया कि कीर्ति बीते 9 साल से इस मकान में रह रहे हैं। ये मकान उन्होंने किराए पर ले रखा है। यहां चंगाई सभा का आयोजन होता है। लोगों को ईसाई धर्म अपनाने की बात कही जाती है। इवेंट्स का आयोजन कीर्ति केशरवानी करते थे। बीमारी या आर्थिक तंगी से परेशान लोग टारगेट स्थानीय निवासी ने बताया कि लोगों को बुलाकर ईसाई धर्म से जुड़ी जानकारियां देते थे। हिंदू धर्म के जो लोग बीमारी या आर्थिक तंगी से परेशान रहते थे, उनको निशाना बनाते थे। उन्हें ईसाई धर्म अपनाने को कहते थे। सभी समस्याओं का समाधान करने की बात कहते थे। रायपुर के किन-किन इलाकों में धर्मांतरण का दावा ? बजरंग दल का दावा है कि रायपुर जोरा, कमल विहार, माना, अमलीडीह, लालपुर समेत आउटर के कुछ इलाकों में धर्मांतरण-मतांतरण की शिकायत मिली है। इसको लेकर पता लगाया जा रहा है। जहां भी धर्मांतरण का खेल चल रहा है, वहां बंद कराया जाएगा। केस- 1- रायपुर में 26 जनवरी को कैसे मचा बवाल ? दरअसल, 26 जनवरी को मितान विहार काॅलोनी के मकान नंबर–3 में पादरी कीर्ति केशरवानी रहता है। यहां सभा भी करता है। मकान में सुबह 11.30 बजे ईसाई धर्म को मानने वाले महारथी बंजारे, जीवन लाल साहू और टंडन पहुंचे थे। इन्होंने चंगाई सभा का आयोजन किया। चंगाई सभा में कॉलोनी में ही रहने वाले हिंदू धर्म के 4 परिवारों के सदस्यों को बुलाया गया। पादरी कीर्ति केशरवानी और उसके सहयोगियों ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया। हिंदू देवी-देवताओं को भला-बुरा कहा। पादरी और उसके साथी केरल के बिलीवर्स ईस्टर्न चर्च के संपर्क में थे। पुलिस ने टंडन नाम के व्यक्ति को छोड़ा स्थानीय और हिंदू संगठनों की शिकायत के बाद पुलिस ने पादरी कीर्ति केशरवानी, उनके सहयोगी महारथी बंजारे और जीवन लाल साहू को गिरफ्तार किया है, लेकिन सहयोगी टंडन नाम के व्यक्ति की शिकायत नहीं मिलने पर कार्रवाई नहीं की। उसे छोड़ दिया गया। नवंबर 2024 में बिलासपुर के रतनपुर बंगलाभाठा गांव में क्रिश्चियन समाज के लोगों ने आदिवासी समुदाय प्रार्थना घर के नाम से चर्च का निर्माण करवाया। हिंदू संगठन के लोगों को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने बंगलाभाठा पहुंचकर प्रदर्शन किया। हिंदूवादी संगठनों ने चर्च स्थल पर हनुमान चालीसा का पाठ किया। उद्घाटन में कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव और बिशप डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ के. सुषमा कुमार चीफ गेस्ट थे। हालांकि बवाल के बीच कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। पढ़ें पूरी खबर… रायगढ़ जिले में 4 नवंबर 2024 को धर्मांतरण को लेकर हिंदू संगठन के लोगों ने बवाल किया। संगठन के प्रदर्शनकारियों का आरोप था, कि प्रार्थना सभा के बहाने महिलाओं का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। मामले में BJP जिला अध्यक्ष ने पुलिस के संरक्षण में पूरा खेल चलने की बात कही। पुलिस और बीजेपी नेताओं में गहमागहमी के बीच चार लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। आरोपियों में संतोष सिंह चौहान, उसकी पत्नी सुषमा सिंह, बहू दयामति और बेटी तृप्ती सिंह का नाम शामिल हैं। गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने जेल भेज दिया था। पढ़ें पूरी खबर… ये लोग स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं- जूदेव अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने दैनिक भास्कर से कहा कि मिशनरी हमारे लिए चुनौती हैं। ये लोग स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं। एक कड़ा कानून जो दोषियों को सजा दे सके अत्यंत जरूरी है। कांग्रेस ने साजिश के तहत बड़ी शातिरता से शिक्षा और स्वास्थ्य मिशनरियों को सौंप दिया, जिन्होंने सेवा के बदले सौदा की नीति के तहत धर्मांतरण का खेल खेला। समाज को संगठित कर धर्मांतरण के खिलाफ अभियान जनजागृति का होना बहुत आवश्यक है। सरकार जुर्म ढा रही है, सब बिक गए हैं- अरुण पन्नालाल छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने मोवा इलाके में हुई घटना को साजिश बताया है। दैनिक भास्कर से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, कि सरकार जुर्म ढा रही और हम सह रहे है। सब बिक गए है, सिर्फ एक नेता की बात चल रही है। वो चाह रहे है हमारा समाज प्रताड़ित हो। रायपुर और बेमेतरा में जो घटनाएं बताई जा रही हैं, वो पूरी तरह गलत है। हमारे समाज के लोग दोनों जगह 26 जनवरी का कार्यक्रम मना रहे थे। हिंदू संगठन के लोग पहुंचे और नारेबाजी करने लगे। वे लोग बोलने लगे कि ये देश तुम्हारा नहीं है। पन्नालाल ने कहा कि हमारे आदमियों पर जबरिया कार्रवाई हुई है। पूरी दुनिया देख रही है कि छत्तीसगढ़ सरकार किस तरह से काम कर रही है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की- IPS अजय कुमार सिविल लाइन CSP अजय कुमार ने बताया कि माया अग्रवाल ने कीर्ति केशरवानी के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। कीर्ति केशरवानी पर किराए के मकान में चर्च चलाने का आरोप है। उनके घर में हर रविवार को प्रार्थना सभा होती थी। वहां कई परिवार बच्चों के साथ आता था। कीर्ति केशरवानी पर हिंदू धर्म को आहत करने का आरोप है। अभी पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब समझिए धर्मांतरण और मतांतरण के बारे में धर्मांतरण: धर्मांतरण किसी ऐसे नये धर्म को अपनाने का कार्य है, जो धर्मांतरित हो रहे व्यक्ति के पिछले धर्म से अलग हो। धर्मांतरित व्यक्ति के साथ-साथ धर्मांतरण कराने वाले शख्स द्वारा जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 60 दिन पहले “धर्मांतरण के इरादे की घोषणा” करनी होती है। पूरी प्रक्रिया के होने के बाद धर्मांतरण होता है। इसमें दूसरा धर्म अपनाने वाला व्यक्ति को अपना सरनेम बदलना होता है। मतांतरण: मतांतरण यानि मत में परिवर्तन होने की क्रिया या भाव को मत परिवर्तन, धर्म परिवर्तन कहते हैं। लेकिन सरकारी कागजों में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता। कई बार किसी ‘विशेष जाति’ के लोग, जो ये महसूस करते हैं कि समाज में उन्हें उचित दर्जा नहीं मिल रहा है, तो वे मतांतरण कर लेते हैं। मतांतरण के बाद शख्स अपनाए गए धर्म की आस्था और मान्यताओं का पालन करने लगता है। छत्तीसगढ़ में तीन तरह के आदिवासी वरिष्ठ पत्रकार आलोक पुतुल बताते हैं, कि छत्तीसगढ़ में तीन तरह के आदिवासी रहते हैं। प्रकृति पूजक (जो पेड़, पशु और पक्षी में अपना देवता खोजते हैं), हिंदू ट्राइबल (हिंदू धर्म और मान्यता को मानने वाले) और ईसाई धर्म को मानने वाले। छत्तीसगढ़ का बड़ा हिस्सा पांचवी अनुसूची का क्षेत्र है। आलोक पुतुल बताते हैं कि छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को पांचवीं अनुसूची के तहत विशेष अधिकार मिलते हैं। पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए कई प्रावधान हैं। बस्तर के इलाके में बड़ी संख्या में ग्राम सभाओं ने प्रस्ताव पास किया है कि हिंदू धर्म के अलावा किसी और धर्म का प्रवेश और प्रार्थना करना प्रतिबंध है। इसको लेकर मसीही समाज के लोग हाईकोर्ट गए थे, लेकिन अभी भी हाईकोर्ट में मामला लंबित है। सभा के प्रस्ताव का उल्लंघन होने पर विवाद जैसी स्थिति आती है। छत्तीसगढ़ में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू, लेकिन सरकार ने नया ड्राफ्ट किया तैयार छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू हो। इस अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ में मौज़ूदा धर्म स्वतंत्रता कानून के तहत ‘बल पूर्वक’ धर्मांतरण कराने पर किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को एक साल की कैद या पांच हज़ार रुपए जुर्माना या फिर दोनों सजाएं साथ-साथ दिए जाने का प्रावधान है। इस नियम को और सख्त साय सरकार कर रही है। तीन राज्यों की स्टडी करके सरकार ने फरवरी 2024 में एक मसौदा तैयार करवाया है। इस नए कानून में 17 प्वाइंट्स को शामिल किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, विधानसभा में इसे पेश करने से पहले कुछ संशोधन होगा। नया कानून लागू होते ही धर्म परिवर्तन से पहले सूचना देनी होगी। ड्राफ्ट के अनुसार यदि प्रलोभन, बल, विवाह या कपटपूर्ण तरीके से किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है, तो धर्मांतरण अवैध माना जाएगा। साथ ही धर्मांतरण के बाद, व्यक्ति को 60 दिनों के भीतर एक और डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा। इसका सत्यापन कराने के लिए उसे स्वयं जिला प्रशासन के अधिकारियों के सामने पेश होना पड़ेगा। धर्मांतरण के बाद व्यक्ति यदि इस नियम का पालन नहीं करता, तो जिला प्रशासन के अधिकारी उसके धर्मांतरण को अवैध करार दे सकते हैं। छत्तीसगढ़ की 19 सीटों में ईसाई मतदाताओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका दरअसल, राज्य की 90 में से सरगुजा संभाग और उससे लगी हुई विधानसभा की 19 सीटों पर ईसाई मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। जशपुर जिले में तो ईसाई मतदाता ही विधानसभा में जीत-हार का फैसला करते हैं। पूर्व सरकार में धर्मांतरण की संख्या इतनी पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा में बताया था कि कांग्रेस सरकार में धर्मांतरण के खिलाफ 34 मामले मात्र दर्ज किए गए हैं, लेकिन इनकी संख्या कहीं ज्यादा है। इस पर कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि 2003 से 2011 के बीच धर्मांतरण के मामलों की संख्या 80 हजार से ज्यादा हैं। 2011 के बाद जनगणना नहीं हुई, इसलिए आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं। ………………………………….. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और उससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… धर्म बदलने से पहले देनी होगी प्रशासन को सूचना: छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम में 17 पॉइंट्स; 3 राज्यों की स्टडी के बाद ड्राफ्ट तैयार छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार धर्मांतरण पर नियंत्रण के लिए कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसे छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम नाम दिया गया है। इसकी जानकारी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा में दी थी। इसके बाद अफसरों ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। पढ़ें पूरी खबर…
