हर साल कहीं न कहीं से मजदूरों को बंधक बनाने की सूचना भी आती है। दुखद पहलू यह है कि न तो पलायन करके जाने वाले मजदूरों का कोई रिकार्ड जिले में रखा जाता है और न ही दूसरे राज्यों में बाहर से आने वाले मजदूरों का कोई लेखा जोखा रखा जाता है। यहां तक कि विभिन्न राज्यों में ऐसे मजदूरों के लिए श्रमिक सहायता केंद्र तक नहीं बनाए गए।
