शिव भक्तो महाशिवरात्रि पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस बार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महाशिवरात्रि व्रत पड़ रहा है। इस साल 26 फरवरी 2025, बुधवार को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर व्रत करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। धार्मिक ग्रंथ के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन भक्त महादेव की उपासना करते हैं और व्रत रखते हैं। महाशिवरात्रि के दिन साधक मंदिर जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं। लेकिन कई बार होता है कि हम गलत तरीके से जलाभिषेक करते है, जिससे कई गलतियां कर बैठते हैं। तो चलिए आपको महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का सही तरीका और नियम जरुर पता होना चाहिए।
भगवान शिव को जलाभिषेक कैसे करें
– भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए तांबे, चांदी या कांच का लोटा लें।
– ध्यान रखें कि शिवलिंग पर जलाभिषेक हमेशा उत्तर की दिशा में करना चाहिए। उत्तर की दिशा शिव जी का बाया अंग मानी जाती है, जो पार्वती माता को समर्पित है।
– सबसे पहले शिवलिंग के जलाधारी के दाएं दिशा में जल चढ़ाना चाहिए, जहां भगवान गणेश जी का वास माना जाता है।
– इसके बाद शिवलिंग के जलाधारी के बाएं दिशा में जल चढ़ाएं, जो भगवान कार्तिकेय की जगह मानी गई है।
– अब शिवलिंग के जलाधारी के बीचों-बीच जल चढ़ाएं, जो भोलेनाथ की पुत्री अशोक सुंदरी को समर्पित है।
– फिर शिवलिंग के चारों ओर चल चढ़ाएं, जो माता पार्वती की जगह मानी जाती है।
– सबसे आखिरी में शिवलिंग के ऊपरी भाग में जल चढ़ाएं।
