भारत माला प्रोजेक्ट…टुकड़ों में जमीन बांटकर 43 करोड़ का घोटाला:SDM-पटवारी के सिंडिकेट ने बैक-डेट पर बनाए दस्तावेज; NHAI को दिखाया 78 करोड़ का भुगतान

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भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम तक बन रही (वाइजैग) इकोनॉमिक कॉरिडोर में जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ी के मामले में शासन ने जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड कर दिया है। निर्भय पर कार्रवाई जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद हुई है। निर्भय कुमार साहू सहित पांच अधिकारी–कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से अधिक राशि की गड़बड़ी का आरोप है। किस तरह से मुआवजा राशि के नाम पर सरकारी पैसों का बंदरबाट हुआ? इस पूरे घोटाले में कौन–कौन शामिल था पढ़िए इस रिपोर्ट में:- पहले जानिए क्या है पूरा मामला छत्तीसगढ़ के अवर सचिव को 8 अगस्त 2022 को धमतरी निवासी शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू और हेमंत देवांगन ने शिकायत की थी, कि भारत माला परियोजना के तहत रायपुर विशाखापट्नम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा बांटने के नाम पर अधिकारियों ने पैसों का बंदरबाट किया। उनकी जमीन का खसरा बदल दिया गया। पूर्व खसरे पर उस राशि का भुगतान दिख रहा है। एसडीएम, नायब तहसीलदार और पटवारी से इसकी शिकायत की है, लेकिन वो समाधान नहीं कर रहे हैं। इन अफसरों ने दस्तावेजों में हेर-फेर कर भू–माफियाओं की मदद से शासन के पैसों का दुरुपयोग किया है। 29.5 करोड़ की जगह 78 करोड़ का भुगतान पीड़ितों की सूचना पर अवर सचिव ने मामले में रायपुर कलेक्टर को जांच करने के निर्देश दिए थे। अवर सचिव के निर्देश पर कमेटी बनी और जांच बैठी, तो पता चला, कि अभनपुर इलाके में पदस्थ तत्कालीन अधिकारियों ने जमीनों के खसरों में हेरफेर करके संबंधित इलाके में 29.5 करोड़ की जगह 78 करोड़ का भुगतान कर दिया। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी थी। जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर पहली कार्रवाई तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी निर्भय कुमार साहू पर हुई है। इन अधिकारियों ने तैयार की थी जांच रिपोर्ट मुआवजा घोटाले की जांच की जिम्मेदारी रायपुर कलेक्टर ने अपर कलेक्टर विरेंद्र बहादुर पंचभाई और निधि साहू को दी थी। इन अधिकारियों ने जांच के बाद घोटाला होने की पुष्टि की थी। घोटाले में शामिल अफसरों से शासकीय राशि को वसूला जाए, इस बात का जिक्र भी किया था। यह रिपोर्ट जुलाई 2024 को तैयार करके भेजी गई थी। जिसके आधार पर शासन ने अब कार्रवाई शुरू की है। जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए राजस्व विभाग के मुताबिक मुआवजा करीब 29.5 करोड़ का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया। मुआवजा के लिए 80 नए नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिया गया। जिससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 78 करोड़ रुपए पहुंच गई। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई। जिसमें से 246 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं 78 करोड़ रुपए का भुगतान अभी रोक दिया गया है। बैक डेट पर दस्तावेजों में गड़बड़ी करने की पुष्टि अवर सचिव के निर्देश पर बनी जांच रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है, कि अभनपुर इलाके में पदस्थ अधिकारियों ने बैक डेट में जाकर दस्तावेजों में गड़बड़ी की और जमीन मालिक को नुकसान पहुंचाया। इसका खुलासा इस बात से अफसरों ने किया, कि अभनपुर के ग्राम नायक बांधा और उरला में चार एकड़ जमीन जो सर्वे से पहले एक परिवार के पास थी। वो सर्वे होने के ठीक कुछ दिन पहले एक ही परिवार के 14 लोगों के नाम पर बांट दी गई। इसके बाद एक ही परिवार के सदस्यों को 70 करोड़ रुपए की मुआवजा का भुगतान कर दिया गया। जांच अधिकारियों ने तत्कालीन अफसरों की इस कार्यप्रणाली का सीधा जिक्र अपनी जांच रिपोर्ट में किया है। NHAI की टीम ने भी जताई थी आपत्ति रायपुर विशाखापट्नम इकोनॉमिक कॉरिडोर में हुई आर्थिक गड़बडी पर NHAI के अधिकारियों ने भी आपत्ति जताई थी। एनएचएआई की आपत्ति के बाद जांच रिपोर्ट को सचिव राजस्व विभाग को भेजा गया था और मुआवजा वितरण रोका गया था। मुआवजा राशि की रिकवरी पर अफसर मौन जिला प्रशासन के अधिकारी जांच रिपोर्ट भेजकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। मुआवजा घोटाले में शासकीय राशि का बंदरबाट हुआ, उसकी रिकवरी किस तरह होगी? इस सवाल का जवाब अफसरों के पास नहीं है। अफसर पूरे मामले में मौन बैठे हैं? जूनियर अधिकारियों से केस में चर्चा करने की बात बोलकर जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी इसमें बयानबाजी करने से भी बच रहे हैं।

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