प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। हर महीने में दो बार प्रदोष व्रत आता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव व माता पार्वती की विधिवत रुप से पूजा की जाती है। यह व्रत मनवांछित फल की प्राप्ति और संतान से जुड़े कष्ट दूर होते हैं। ज्योतिष के अनुसार, पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और दूसरा प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रियोदशी भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने पर इस भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं मार्च का पहला प्रदोष व्रत कब है।
मार्च में भौम प्रदोष कब पड़ रहा है?
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष त्रयोदशी 11 मार्च को सुबह 08 बजकर 13 मिनट पर प्रारंभ होगी और 12 मार्च को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, प्रदोष व्रत 11 मार्च 2025, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन मंगलवार पड़ रहा है इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है।
शिव पूजन मुहूर्त
शिव पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 27 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट पर रहेगा।
बन रहे हैं शुभ योग
इस बार भौम प्रदोष व्रत के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग व रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। माना जाता है कि इस योग में किए गए कार्यों का शुभ परिणाम मिलता है।
व्रत पारण मुहूर्त
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत का पारण 12 मार्च 2025 को सुबह 06 बजकर 34 मिनट के बाद किया जा सकता है।
