23 की उम्र में केमिकल-फ्री फूड-प्रोडक्ट्स का बिजनेस:छत्तीसगढ़ की ईशा की कंपनी को कई देशों से ऑर्डर; शार्क टैंक से 1 करोड़ की फंडिंग

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ये एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसने महज 23 साल की उम्र में ही बड़ा नाम और काम दोनों बना लिए। महज 25 हजार रुपए लगाकर 3 साल में 10 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी। कम उम्र में उसने न सिर्फ अपनी कंपनी बनाई, बल्कि अपने बनाए प्रोडक्ट्स देशभर में सप्लाई कर रही है। यह कहानी है छत्तीसगढ़ के एक छोटे से जिले धमतरी में रहने वाली ईशा झंवर की। पैकेज्ड फूड की वजह से ईशा बीमार पड़ गईं, जिसके बाद उन्होंने खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया। अब वह केमिकल फ्री केचप जैसे हेल्दी प्रोडक्ट बना रही हैं। ईशा शार्क टैंक सीजन 4 से सिर्फ 60 सेकेंड में 1 करोड़ रुपए की फंडिंग भी ला चुकी हैं। ईशा का दावा है कि कंपनी केमिकल फ्री टोमेटो केचप, मेयोनीज, तंदूरी मेयोनीज, पिज़्ज़ा पास्ता सॉस और इमली-डेट सॉस बनाती है। उनके प्रोडक्ट में शुगर, प्रिजर्वेटिव या कोई केमिकल नहीं है। अब उन्हें लंदन, अमेरिका, जर्मनी, ||ऑस्ट्रेलिया, कैनेडा, दुबई से भी ऑर्डर आ रहे हैं। ईशा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने स्टार्टअप जर्नी के एक्सपीरियंस के बारे में बताया। सवाल: कंपनी की शुरुआत कब की है ? जवाब: कंपनी की शुरुआत तो मैंने ने 2022 में ही कर दी थी, लेकिन अपना पहला प्रोडक्ट अगस्त 2024 में लॉन्च किया। सवाल: आपको स्टार्टअप शुरू करने का आइडिया कैसे आया? जवाब: ईशा ने बताया कि उनका जन्म धमतरी में हुआ और तीसरी कक्षा तक वहीं पढ़ाई की। इसके बाद वे रायपुर चली गईं, फिर 11वीं और 12वीं के लिए कोटा में रहीं। कॉलेज की पढ़ाई के लिए पटियाला गईं, जहां हॉस्टल में रहते हुए पैकेज्ड फूड खाने की आदत लग गई। इसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा, जिससे पहले से मौजूद PCOD, किडनी स्टोन और अन्य समस्याएं और बढ़ गईं। घर लौटने पर, उनकी मां ने पैकेज्ड फूड खाने पर डांट लगाई, जिससे ईशा को महसूस हुआ कि हेल्दी खाने के विकल्प कम हैं, इसलिए उन्होंने खुद सेहतमंद फूड प्रोडक्ट्स बनाने का फैसला किया। यही विचार आगे चलकर उनके स्टार्टअप की नींव बना। सवाल: आपका स्टार्टअप कौन-से प्रोडक्ट बनाता है? जवाब: हमारी कंपनी हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स बनाती है, जिसमें टोमेटो केचप, मेयोनीज, तंदूरी मेयोनीज, पिज़्ज़ा पास्ता सॉस और इमली-डेट सॉस जैसे हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स है। सवाल: स्टार्टअप शुरू करने में सबसे बड़ी चुनौती क्या थी? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती एक सही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ढूंढना था। मैं चाहती थी कि उनका प्रोडक्ट शुद्ध और साफ-सुथरे माहौल में तैयार हो, लेकिन उन्हें भारत में ऐसी कोई यूनिट नहीं मिली। तब मैंने खुद अपनी यूनिट लगाने का फैसला किया, जो धमतरी से 2 किमी दूर लोहरसी मोड़ पर स्थित है। उनका ऑफिस रायपुर से ऑपरेट होता है। सवाल: स्टार्टअप के लिए आपको फंडिंग कहां से मिली? जवाब: स्टार्टअप के लिए पहली फंडिंग मेरे पापा राकेश झंवर ने दी। इसके बाद कॉलेज से 25,000 रुपए का सहयोग मिला। सरकार ने इनोवेशन के लिए 33 लाख रुपए का ग्रांट दिया। इस आर्थिक सहयोग से मैंने अपने ब्रांड को आगे बढ़ाया। सवाल: आपको शार्क टैंक में कैसे सफलता मिली? जवाब: ईशा झंवर ने बताया कि वो छत्तीसगढ़ की पहली युवती हैं, जिन्होंने शार्क टैंक इंडिया सीजन-4 में जगह बनाई। मैंने अपने प्रोडक्ट्स के साथ न केवल अपने बिजनेस बल्कि धमतरी और छत्तीसगढ़ को भी बेहतरीन तरीके से पेश किया। खास बात यह थी कि मैंने सिर्फ 60 सेकेंड में अपने ब्रांड, धमतरी और छत्तीसगढ़ के बारे में समझाया। शार्क टैंक के दौरान मुझे सबसे ज्यादा डर अनुपम मित्तल से था, क्योंकि वे हेल्दी फूड प्रोडक्ट्स को लेकर काफी सख्त माने जाते हैं। लेकिन जब मैंने अपना प्रोडक्ट समझाया, तो शार्क ने मेरे स्टार्टअप में रुचि दिखाई। उन्हें 1 करोड़ रुपए की फंडिंग (50 लाख तत्काल और 50 लाख की कमिटमेंट) मिली। अभी मेरी कंपनी की वैल्यू करीब 10 करोड़ है। सवाल: क्या आपके प्रोडक्ट ऑनलाइन उपलब्ध हैं? जवाब: हां, आज उनका प्रोडक्ट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। उनका दावा है कि भारत में इस तरह के पांच प्रोडक्ट्स में उनका उत्पाद नंबर वन पर है। मेरी कंपनी स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी दे रही है। कई बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिली है। सवाल: अभी कंपनी का टर्नओवर कितना है और भविष्य में क्या प्लानिंग है? जवाब: वर्तमान में हमारा टर्नओवर लगभग 30 लाख रुपए है। हमें उम्मीद है कि यह जल्द ही 50 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। मेरी कंपनी में करीब 10 लोग काम कर रहे हैं, जिनमें 6 महिलाएं और 4 पुरुष हैं। अभी काम बढ़ने वाला है। वर्कर्स भी बढ़ाने पड़ेंगे। सवाल: ईशा झंवर को सोशल मीडिया पर ट्रोल क्यों किया गया? जवाब: शार्क टैंक में मेरी पिच के बाद कुछ लोगों ने धमतरी को छोटा कहने पर मुझे ट्रोल किया। इस पर ईशा ने कहा कि धमतरी जनसंख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से एक छोटी जगह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे अपने शहर को छोटा दिखा रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी जगहों की तुलना में छोटे शहरों में बिजनेस के लिए सही इकोसिस्टम नहीं होता, जिससे चुनौतियां बढ़ जाती हैं। सवाल: समाज में लड़कियों को लेकर जो सोच उस पर आप क्या कहेंगी ? जवाब: ईशा ने समाज की उस मानसिकता पर भी सवाल उठाया, जो लड़कियों की पूरी पर्सनैलिटी को सिर्फ शादी से जोड़कर देखती है। जब उनके पिता ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगानी शुरू की, तो लोगों ने ताने मारे कि बेटी के लिए फैक्ट्री लगा रहे हो, उसकी शादी कैसे होगी? मेरा मानना है कि लड़कियां पढ़ाई तो कर रही हैं, लेकिन कितनी लड़कियां आगे बढ़कर खुद का बिजनेस कर रही हैं? समाज को इस सोच को बदलने की जरूरत है। सवाल: आप लड़कियों के लिए क्या संदेश देना चाहती हैं? जवाब: ईशा झंवर ने युवाओं, खासकर लड़कियों को मैसेज देते हुए कहा, लोग कुछ न कुछ कहेंगे, लेकिन आपको वही करना चाहिए, जो आपके दिल की आवाज हो। सुनो सबकी, करो मन की। ………………………………………….. इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें इंजीनियरिंग के बाद जॉब नहीं की…मटपरई-आर्ट को बनाया पैशन:छत्तीसगढ़ में विलुप्त हो रहे शिल्प को आगे बढ़ा रहे अभिषेक; 40-50 हजार हो रही इनकम छत्तीसगढ़ के एक युवा इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद विलुप्त हो रहे मटपरई शिल्प पर काम कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक एंड टेली कम्युनिकेशन में बीटेक करने के बाद नौकरी नहीं करके विलुप्त हो रहे आर्ट को ही अपना पैशन बनाया, अब वे हर महीने 40 से 50 हजार रुपए कमा रहे हैं, साथ ही मटपरई शिल्प को आगे बढ़ाने का भी काम कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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