म्यूल अकाउंट्स ऑपरेट कराने फ्लाइट्स–ट्रेन से सिम की डिलीवरी:छत्तीसगढ़ के 12,000 सिम विदेश में एक्टिव; महादेव-ऐप-साइबर ठग से अकाउंट्स पर 5-50,000 किराया फिक्स

0
36

छत्तीसगढ़ में महादेव सट्टा और साइबर जालसाजों ने 2024-25 में लोगों से 168 करोड़ रुपए ठगे हैं। महादेव सट्टा ऐप की वजह से कई लोग बर्बाद हो चुके हैं। पुलिस ने 70 से ज्यादा FIR में 500 POS एजेंट्स को गिरफ्तार किया है। ये एजेंट्स फर्जी सिम, म्यूल, सेविंग और करंट अकाउंट्स बेचते और किराए में देते थे। इसके अलावा फ्लाइट्स, ट्रेन और कुरियर के जरिए सिम को विदेश भेजते थे। महादेव ऐप और ठगों को डुप्लीकेट ID से लेकर दिए गए सिम की संख्या 12 हजार से ज्यादा है। सिम और बैंक अकाउंट्स के अलग-अलग रेट्स फिक्स है। इनमें एक सिम के 1000-3000 और अकाउंट्स के प्रति माह 5 हजार से 50 हजार तक किराया मिल रहा है। वहीं भारत में संदिग्ध सिम कार्ड्स के लोकेशन की बात करें तो गोवा, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, UP-बिहार, झारखंड है, जबकि भारत से बाहर संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार में एक्टिव हैं। इस रिपोर्ट में पढ़िए कैसे POS एजेंट फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट करते हैं, कैसे म्यूल, सेविंग और करंट अकाउंट्स किराए पर देते हैं। 20 फरवरी को रायपुर साइबर रेंज के अफसरों ने 85 करोड़ रुपए की ठगी में शामिल 72 आरोपियों को पकड़ा। इनमें नाइजीरियन युवक भी शामिल थे। इन आरोपियों से जानकारी के आधार पर पुलिस ने म्यूल अकाउंट्स खुलवाने वाले बैंक मैनेजर को पकड़ा। इसके साथ ही उन्हें सिम प्रोवाइड कराने वाले POS सेंटर संचालकों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी फर्जी दस्तावेजों से सिम एक्टिव कर POS एजेंट को उपलब्ध कराते थे। इन सभी आरोपियों को अच्छी खासी इनकम होती थी। 26 फरवरी को बिलासपुर साइबर पुलिस ने 48 लाख 42 हजार रुपए की ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह के सरगना समेत 3 आरोपियों को पकड़ा। पुलिस ने इन सभी आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। निवेश में फंसे पैसे दिलाने के बहाने ठगी गिरोह के सदस्य लैप्स बीमा पॉलिसी और निवेश में फंसे पैसे दिलाने के बहाने अपना शिकार बनाकर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कराते थे। इन आरोपियों ने 60 म्यूल अकाउंट्स से 3 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया था। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से आकर भिलाई में म्यूल अकाउंट्स बेचने वाले संजय जायसवाल (38) और राजेश जायसवाल को 5 फरवरी को सुपेला पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों ने पुलिस की पूछताछ में दिल्ली के ठगों को अकाउंट उपलब्ध कराने की बात कही थी। अब जानिए कैसे एक्टिव हुई छत्तीसगढ़ पुलिस ? दरअसल, 4 महीने पहले रायपुर पुलिस को केन्द्र सरकार से 1150 खातों की एक लिस्ट भेजी गई थी। इन खातों के खिलाफ साइबर क्राइम पोर्टल में शिकायत दर्ज हुई थी। खातों की जानकारी मिलने के बाद रायपुर आईजी के निर्देश पर ऑपरेशन शील्ड लॉन्च किया गया। इस ऑपरेशन में 100 लोगों की टीम लगी। POS एजेंट और इससे जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की गई। अभी भी 100 से ज्यादा खातों की जांच साइबर सेल की टीम कर रही है, जिसमें कई गिरफ्तारियां हो सकती है। सिम के 1-3 हजार और अकाउंट के अलग-अलग रेट्स पुलिस की जांच में ये बात सामने आई है, कि OPS एजेंट और अकाउंट्स ब्रोकर पार्टियों की बोली के हिसाब से उन्हें सामान उपलब्ध करवाते थे। 100 रुपए में मिलने वाला सिम 1 हजार से 3 हजार में बेचते थे। अकाउंट्स की डील कैश लेकर कमीशन के रूप में होती थी। अगर अकाउंट्स सेविंग होता था, तो उसका 5 हजार से लेकर 50 हजार तक मिलता था। इसी तरह से अकाउंट्स अगर करंट होता था, तो ट्रांजेक्शन अमाउंट का 10-20 प्रतिशत अकाउंट होल्डर को दिया जाता था। देशभर में 19 लाख से अधिक म्यूल अकाउंट्स 12 फरवरी को केंद्र सरकार ने साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट्स का खुलासा किया था। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ये रिपोर्ट सार्वजनिक की थी। केंद्रीय गृहमंत्री के अनुसार देश के अलग-अलग राज्यों में 19 लाख से अधिक म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई है। अमित शाह ने बताया कि 2 हजार 38 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेन-देन को रोका गया है। साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले म्यूल अकाउंट्स की पहचान के लिए आने वाले दिनों में सरकार AI का इस्तेमाल करेगी। 805 ऐप्स और 3 हजार 266 वेबसाइट लिंक को ब्लॉक करने की बात मीडिया से दोहराई थी। पार्सल में क्या है इसकी जिम्मेदारी बुकिंग एजेंसियों की- रेलवे कुरियर के जरिए सिम किस तरह ट्रेन और फ्लाइट से भेजा जा रहा है। इसकी जानकारी के लिए दैनिक भास्कर टीम ने रायपुर रेल मंडल और एयरपोर्ट प्रबंधन के अधिकारियों से चर्चा की। रिपोर्टर ने जिम्मेदार अधिकारियों से पार्सल जांचने की नियम और प्रक्रिया पूछी। रायपुर रेल मंडल के सीनियर अधिकारी अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया, कि रेलवे पार्सल भेजने का काम करता है। बुकिंग पोस्ट ऑफिस या कूरियर एजेंसियों के माध्यम से होती है। पार्सल में क्या जा रहा है? इसकी जिम्मेदार बुकिंग करने वाले एजेंसियों की है। उनके पास से जो पार्सल आता है, हम उन्हीं को भेजते हैं। वहीं एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों ने सिक्योरिटी का हवाला देकर इस मुद्दे पर जानकारी नहीं दी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here