डॉ. राजेश कुमार शुक्ला ने विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया में यूजीसी रेग्युलेशन 2018 के उल्लंघन का आरोप लगाया था। उन्होंने कोर्ट में लगाई याचिका में तर्क दिया था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अर्हता प्राप्त न करने वाले आवेदकों को त्रुटिपूर्ण सत्यापन के आधार पर साक्षात्कार के लिए योग्य घोषित किया, जो नियमों के खिलाफ है।
