सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान जारी है। देश के 17 राज्यों के 7 करोड़ लोग, खासकर आदिवासी तबके में पीढ़ी-दर-पीढ़ी होने वाली बीमारी की जांच हो रही है। 5 करोड़ की हो भी चुकी है। 16 लाख लोगों में बीमारी या इसके लक्षण पाए गए हैं। इन्हें अब जागरूक किया जा रहा है, ताकि रोग अगली पीढ़ी तक न पहुंचे। इसके लिए विवाह संबंध में सावधानी वाली सरकार की एडवाइजरी याद कराई जा रही है। बताया जा रहा है कि रोगी-रोगी आपस में विवाह नहीं कर सकते। वैसे यह एडवाइजरी पुरानी है, लेकिन अब ज्यादा लोगों तक पहुंची है। इसलिए चर्चा ज्यादा है और अब चिंता भी दिखाई देने लगी है। ‘रोगी-रोगी आपस में विवाह कर नहीं सकते, वहीं कोई सामान्य व्यक्ति, किसी रोगी से विवाह करना नहीं चाहता, तो फिर समाज में रिश्ते होंगे कैसे?’ दैनिक भास्कर ने इस समस्या से जूझ रहे राजस्थान, मप्र और छत्तीसगढ़ के उन इलाकों में विवाह संबंधों पर गहराए इस संकट को जाना, जहां सिकल सेल एनीमिया के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। गांव और समाज में पैदा हो रही विवशताओं पर तीन राज्यों से रिपोर्ट मध्यप्रदेश – पता चल गया तो किसी से संबंध नहीं होगा झाबुआ के ग्राम खंडाला के खुमसिंह, पत्नी, बेटी पॉजिटिव निकले। पर किसी को नहीं बताया। कहते हैं- पता चला तो रिश्ता नहीं होगा। एमएससी कर चुकी ग्राम मिंडल की रमिला कुमारी कहती हैं- पहले नहीं बताया तो शादी के बाद छोड़ देंगे। झाबुआ में 2021 से 7.63 लाख जांच हुईं। 1248 रोगी, 14,442 वाहक मिले। राजस्थान -समाज से छिपाकर, दूर गांवों में रिश्ता तलाश रहे बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ ब्लॉक की रमाबाई की 8 संतानों में से 4 का टेस्ट हुआ। तीन पॉजिटिव निकलीं। इनमें 2 बेटियां हैं। पिता कहते हैं, ‘हम बीमारी छिपाकर दूर गांव में बेटी का रिश्ता करेंगे, वरना तो कौन बेटा ब्याहेगा। बांसवाड़ा जिले में अक्टूबर 2024 तक 3156 रोगी-वाहक मिला चुके थे। इधर, कुशलगढ़ की अनीता सरकारी कर्मचारी है। स्वस्थ हैं, लेकिन पीड़ा जीते-जी खत्म होना नामुमकिन है। उनका 18 साल का बेटा सिकल सेल बीमारी के लिए उन्हें दोषी ठहराता है। दरअसल, अनीता, उनके पति दोनों बीमारी के वाहक हैं। हालांकि ऐसे मामलों में संतान के रोगी होने की आशंका 25% होती है। दुर्योग से बेटा रोगी ही पैदा हुआ। इसी तरह पश्चिमी राजस्थान की प्रमिला (बदला नाम) सिकल सेल की वाहक है। उसमें बीमारी के लक्षण हैं। माता-पिता को रिश्ता तलाशने में सावधानी बरतनी है। क्योंकि सिकल सेल के रोगी आपस में विवाह नहीं कर सकते। वाहक भी सामान्य व्यक्ति से शादी करे तो ही ठीक। माता-पिता चिंतित हैं कि समुदाय के लोग सिकल सेल कार्ड देखकर रिश्ते कर रहे हैं, तो उनकी बेटी से कौन सामान्य लड़का ब्याहेगा? छत्तीसगढ़ – 1000 यूनिट खून चढ़ा, बिन ब्याही एमकॉम बेटी एमकॉम कर चुकीं राजनांदगांव की मधु जन्म से रोगी हैं। 31 वर्ष की होने तक 1 हजार यूनिट खून चढ़ा चुका है। जीवन डोनर और दवा पर निर्भर है, तो रिश्ता नहीं मिल पा रहा। यही स्थिति शालिनी की थी। शिक्षक माता-पिता ने ग्रेजुएट बेटी की शादी प्रवासी मजदूर से कर दी।
(रोगी, परिजन के नाम परिवर्तित हैं)
