तुर्किये के इस्तांबुल में 6.2 तीव्रता का भूकंप:1 घंटे में भूकंप के 3 बड़े झटके, मरमारा सागर में था भूकंप का केंद्र

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तुर्किये के इस्तांबुल में आज 6.2 तीव्रता का एक बड़ा भूकंप आया। इसका केंद्र इस्तांबुल के पास मरमारा सागर में था। तुर्किये की इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी ने बुधवार को बताया कि भूकंप से अभी तक किसी तरह के नुकसान या चोट की कोई खबर नहीं है। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज ने भी भूकंप की पुष्टि की है और कहा है कि भूकंप जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था। भूंकप से शहर और आसपास के इलाकों में बड़े झटके महसूस किए गए। लोकल मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक भूकंप का सेंटर सिलिवरी के नजदीक था, जो तटीय क्षेत्र है और भूकंपीय एक्टिविटी के लिए जाना जाता है। 1 घंटे में भूकंप के तीन बड़े झटके… लोगों को चेतावनी- क्षतिग्रस्त इमारतों न जाएं
इस्तांबुल के अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि वो भूकंप की वजह डैमेज हुई इमारतों में न जाएं। जब तक जरूरी न हो गाड़ी न चलाएं और मोबाइल न इस्तेमाल न करें। जल्द ही डिजास्टर मैनेजमेंट की टीमें नुकसान का आंकलन करेंगी। लोग बोले- तुर्किये में रहना मतलब भूकंप के साथ जीना
लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्तांबुल के इस इलाके में बीते 6 सालों में भूकंप के इतने शक्तिशाली झटके महसूस नहीं किए गए। लोगों का कहना है कि अचानक इमारतें हिलने लगीं, इसके बाद लोग घर छोड़कर बाहर की तरफ भाग निकले। तुर्किये में रहने का मतलब है भूकंप के साथ जीना। दो साल पहले भूकंप से 20 हजार लोगों की जान गई थी
दो साल पहले तुर्किये और सीरिया में आए भूकंप से 22,765 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 75 हजार से ज्यादा घायल हुए थे। तुर्किये में 20 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई थी, जबकि 35 हजार से ज्यादा लोगों के घायल हुए थे। 3 बड़ी टैक्टोनिक प्लेट्स के बीच फंसा है तुर्किये
तुर्किये में हमेशा भूकंप का खतरा बना रहता है, इसकी वजह समझने के लिए हमें धरती की डिजाइन को समझना होगा। दरअसल, धरती बड़ी-बड़ी टैक्टोनिक प्लेट्स पर स्थित है। इसके नीचे तरल पदार्थ लावा है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है और इस डिस्‍टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। तुर्की का ज्यादातर हिस्सा एनाटोलियन टैक्टोनिक प्लेट पर बसा है। ये प्लेट यूरोशियन, अफ्रीकन और अरबियन प्लेट के बीच में फंसी हुई है। जब अफ्रीकन और अरबियन प्लेट शिफ्ट होती हैं तो तुर्की सैंडविच की तरह फंस जाता है। इससे धरती के अंदर से ऊर्जी निकलती है और भूकंप आते हैं।

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