कान्स में ‘अरण्येर दिन रात्रि’ फिल्म की स्क्रीनिंग:शूटिंग के दौरान चौकीदार के कमरे में रहती थीं ‘नवाबों की बहू’, सिमी ग्रेवाल को मिला था बंगला

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सत्यजीत रे की क्लासिक बंगाली फिल्म ‘अरण्येर दिन रात्रि’ अब एक बार फिर चर्चा में है। फिल्म को 6 साल की मेहनत से रिस्टोर कर अब कान्स फिल्म फेस्टिवल के क्लासिक सेक्शन में दिखाया गया। इस खास मौके पर शर्मिला टैगोर और सिमी ग्रेवाल खुद फिल्म के प्रीमियर में शामिल हुईं। इस इवेंट को हॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर वेस एंडरसन ने होस्ट किया। बता दें कि ये फिल्म 1970 में बनी थी और इसमें सौमित्र चटर्जी, शुभेंदु चटर्जी, समित भांजा, रबी घोष, शर्मिला टैगोर, सिमी ग्रेवाल, कावेरी बोस और अपर्णा सेन जैसे कलाकार थे। फिल्म की स्क्रीनिंग ने कलाकारों को पुराने दिन याद दिला दिए। पटौदी नवाब खानदान की बहू और एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि वो उस वक्त राजेश खन्ना के साथ ‘आराधना’ की शूटिंग कर रही थीं, तभी सत्यजीत रे का फोन आया। उन्होंने बिना सोचे हां कर दी, लेकिन फोन रखकर याद आया कि वो मई में ‘मेरे सपनों की रानी’ की शूटिंग के लिए पहले से कमिट थीं। उन्होंने शांति समंता से बात कर किसी तरह डेट्स एडजस्ट कीं और रे की फिल्म में काम किया। शर्मिला ने कहा, “सत्यजीत रे को ना बोलने की हिम्मत नहीं थी। मैं उन्हें पिता की तरह सम्मान देती थी।” झारखंड के पलामू में हुई थी शूटिंग फिल्म की शूटिंग झारखंड के पलामू इलाके में हुई थी, जहां गर्मियों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। शूटिंग मई में हुई क्योंकि रे चाहते थे कि पेड़ों के पत्ते ना हों, जिससे जंगल का एक खास रूप दिख सके। चौकीदार के कमरे में रुकी थीं शर्मिला टैगोर
शर्मिला ने बताया, “हम सब अलग-अलग जगहों पर ठहरे थे। सिमी ग्रेवाल और काबेरी बोस एक बंगले में रुकी थीं क्योंकि वहां रहने की जगह की कमी थी। वो दोनों एक पास के गांव में, जंगल के बीच एक अच्छे से बंगले में ठहरी थीं। सत्यजीत रे, सौमित्र चटर्जी और बाकी क्रू के सदस्य किसी और जगह ठहरे हुए थे। समीत भांजा, शुभेंदु चटर्जी, रबी घोष और मैं एक अलग जगह पर थे। मुझे चौकीदार का कमरा मिला था और शुक्र है कि वहां एक वॉटर कूलर था। गर्मियों में वो बहुत अच्छा काम करता था। बाकी लोग टिन की छत वाले शेड में ठहरे हुए थे। उन्होंने आगे ये भी कहा कि इतनी गर्मी थी कि सब मजाक में खुद को ‘रबी रोस्ट’ और ‘सॉतेड शुभेंदु’ कहते थे।” शूटिंग सुबह 5:30 से 9 बजे और फिर शाम 3 से 6 बजे तक होती थी। बाकी समय सब आपस में बातें करते थे।

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