मेकाहारा में 90 करोड़ से ज्यादा की मशीनें एक्सपायर:महीनेभर में 133 मरीजों ने बिना बताए छोड़ा हॉस्पिटल, 46 ने LAMA लिया, 52 मौतें

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छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल मेकाहारा में जून महीने में इमरजेंसी के साथ दूसरे डिपार्टमेंट में भर्ती हुए 133 मरीजों ने बिना बताए अस्पताल छोड़ दिया। 46 मरीज लामा (लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस) लेकर दूसरे अस्पतालों में चले गए। 52 केसेस ऐसे भी हैं, जहां जून महीने में आपात स्थिति में पहुंचे मरीजों ने दम तोड़ दिया। 152 लोगों को डीकेएस अस्पताल रेफर कर दिया गया। दरअसल, हॉस्पिटल में लगातार पेशेंट्स बढ़ रहे हैं, लेकिन इन्फ्रास्ट्रक्चर और मशीनें दुरुस्त नहीं हैं। हॉस्पिटल में CT स्कैन, MRI, एक्स-रे समेत 90 करोड़ से ज्यादा की 90 प्रतिशत मशीन एक्सपायर हो चुकी हैं। जिसके चलते मरीजों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। अब मरीजों का विश्वास सरकारी अस्पताल से उठ रहा है। हालांकि, हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इतनी बड़ी संख्या में मरीजों की अस्पताल छोड़ने की बात को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने मामले में जांच की बात कही है। इस रिपोर्ट में पढ़िए अस्पताल की स्थिति, बजट, मशीनों का हाल और हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर से खास बातचीत। 3,500 मरीज हर महीने मेकाहारा पहुंच रहे इमरजेंसी में औसतन 3,500 से ज्यादा मरीज हर महीने मेकाहारा पहुंचते हैं। इनमें से कुछ को प्राइमरी इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है। कुछ गंभीर मरीजों को उनकी स्थिति के आधार पर भर्ती किया जाता है। आगे की इलाज की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। समस्या ये है कि अस्पताल में इस समय मौजूद आधी से अधिक मशीनों की एक्सपायरी डेट एंड हो चुकी है, लेकिन अस्पताल इन्हीं मशीनों के भरोसे जीवित है। ये पुरानी मशीन अक्सर साथ छोड़ देती हैं। अन्य संसाधनों की कमी के कारण इलाज में देरी होती है। दिवंगत कवि डॉक्टर सुरेंद्र दुबे की भी नहीं हो पाई थी जांच पिछले सवा साल से सिटी इंजेक्टर मशीन भी खराब है। मौत के कुछ दिन पहले दिवंगत पद्मश्री डॉक्टर सुरेंद्र दुबे भी मेकाहारा पहुंचे थे, लेकिन उनकी जांच भी नहीं हो पाई थी। हमने अस्पताल में मौजूद 11 मशीनों की पड़ताल कि इनमें 7 मशीनें एक्सपायर हो चुकी हैं। वहीं, तीन मशीनें दो साल से अधिक समय से बंद पड़ी हैं। एक मशीन कंडम हो चुकी है। बावजूद इसके पिछले 7 साल से मेकाहारा में नई मशीनें खरीदने के लिए कोई विशेष एफर्ट डाले नहीं गए। हालांकि अस्पताल की ओर से समय-समय पर मशीनों की डिमांड जरूर की गई है। पिछले साल मशीनों के लिए 200 करोड़ मांगे गए, मिले सिर्फ 94.5 करोड़ पिछले साल भी अस्पताल की ओर से 200 करोड़ रुपए की लागत से मशीन खरीदने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसमें केवल 94.5 करोड़ रुपए की मशीनों को मंजूरी मिली थी। सबसे बड़ी बात यह थी कि बजट में MRI 3 टेसला के लिए 28.5 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, लेकिन केवल 15 करोड़ रुपए दिए गए हैं। जरूरत कैंसर सर्जरी विभाग को थी, मशीन जनरल सर्जरी में दे दी गई इसी तरह सीटी स्कैन 256 स्लाइस के लिए 26 करोड़ की मंजूरी बजट में दी गई थी। लेकिन 14 करोड़ रुपए की स्वीकृति ही आई। जनरल सर्जरी के लिए रोबोट सिस्टम भी मिला है, जबकि रोबोट सिस्टम लगाने की योजना कैंसर सर्जरी विभाग में थी। यहां एमसीएच यानी मीन कॉर्पस्कुलर हीमोग्लोबिन की तीन सीटें भी मिल चुकी हैं, जो पहले ही राउंड में भर ली गई है। पढ़िए मेकाहारा अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने क्या कहा ? सवाल: सही इलाज नहीं मिलने के कारण मरीज हॉस्पिटल छोड़ कर जा रहे हैं? जवाब: ऐसा नहीं है कोई मरीज इलाज न मिलने की वजह से हॉस्पिटल छोड़कर गया हो। हर दिन एक हजार से ज्यादा मरीज हॉस्पिटल में एडमिट रहते हैं। इमरजेंसी में 60-70 मरीज कभी भी मिल जाएंगे। इनमें कई ऐसे होते हैं, जिन्हें बड़ी समस्या नहीं होती, वो प्राइमरी इलाज लेकर चले जाते हैं। कुछ मरीजों को इलाज लंबा चलता है। इनमें से कुछ मरीज अपनी निजी समस्याओं को ध्यान में रखकर रिक्वेस्ट करते हैं कि वो इलाज अपने आस-पास के हॉस्पिटल में करा सकते हैं। ऐसे में हम इन्हें डिस्चार्ज ऑन रिक्वेस्ट देते हैं। इनमें वो मरीज जिनकी स्थिति ज्यादा गंभीर होती, उन्हें समझाइश देते हैं, लेकिन वो लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस (LAMA) ले लेते हैं, तब समस्या होती है। सवाल: महीने भर ने 46 मरीजों ने लामा लिया है ? जवाब: हमारा हॉस्पिटल 1340 बेड का है। एक हजार रोज की ऑक्यूपेंसी है, ऐसे में 46 मरीजों का LAMA लेकर जाना बहुत बड़ी संख्या नहीं है। ये सामान्य है। सवाल: पिछले एक महीने डेथ के 52 केसेस हैं, ये क्या इलाज में लापरवाही नहीं है? जवाब: इलाज में लापरवाही नहीं कह सकते। हमारे पास आस-पास के हॉस्पिटल से बेहद क्रिटिकल कंडीशन में मरीज आते हैं। हम इन्हें भर्ती करने से मना नहीं करते। डॉक्टर अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन कई दफा हमारे हाथ से चीजें निकल चुकी होती हैं। ऐसे में डेथ काउंट बढ़ता है। इस संबंध में CMHO को भी जानकारी दी गई है। सवाल: इतने बड़े अस्पतालों में मशीनें नहीं चल रही हैं, इस पर हॉस्पिटल क्या कर रहा है? जवाब: मेकाहारा बड़ा इंस्टीट्यूट है। मशीनें खराब होंगी, कई एंड ऑफ लाइफ भी होंगी। इसमें कोई दो मत नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है कि किसी मशीन के खराब होने से किसी मरीज का इलाज प्रभावित हो रहा हो। नई मशीनें हम लगातार मंगाते रहते हैं। डिमांड भी लगातार भेजते रहते हैं। जो नई नहीं आ पाती, उन मशीनों का लगातार हम मेंटेनेंस कराते रहते हैं। लेकिन हां ये जरूर है कि इन सब चीजों में समय लगता है। समस्या को समझना, एस्टीमेट लेना, वर्क ऑर्डर बनाना, अप्रुवल लेना एक पूरे प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता है। नई CT स्कैन मशीन और MRI जल्द मिलेंगी डॉ सोनकर ने बताया कि, अस्पताल में CT स्कैन और नई MRI मशीन भी जल्द उपलब्ध हो जाएगी। सरकार ने इसके लिए बजट स्वीकृत कर दिया है। खरीदी के लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इससे इन दोनों जांच के लिए जो 15-15 दिन की वेटिंग होती थी, वो खत्म हो जाएगी। अब अस्पताल में एक ही CT स्कैन मशीन है। …………………………. इससे संबंधित ये खबर भी पढ़ें… मेकाहारा में नहीं मिला वार्ड बॉय…इसलिए अटेंडर-डॉक्टर्स भिड़े: 500 से ज्यादा पद खाली, डॉक्टर बोले- सरकार नहीं कर रही भर्ती; जूडा पर बढ़ रहा वर्कलोड रायपुर स्थित राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर हॉस्पिटल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। जिसके कारण यहां काम तो प्रभावित हो रहा है, वहीं डॉक्टर्स-मरीजों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है। दरअसल, रविवार रात नाइट ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर्स और मरीज के साथ पहुंचे अटेंडर्स के बीच गाली-गलौज और मारपीट हो गई। पढ़ें पूरी खबर…

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