उन्होंने कहा कि हमारे धर्मग्रंथ काफी समृद्ध और दूरदर्शिता से परिपूर्ण हैं। इन ग्रंथों में जीवन को सदगुणों से श्रृंगारित करने के अनेक मंत्र दिए गए हैं। न केवल गृहस्थ, बल्कि साधु-साध्वी और तीर्थंकरों के लिए भी इन ग्रंथों में एक तरह से आचार संहिता दी गई है।
