रूस के कामचटका में 600 साल बाद ज्वालामुखी फटा:6000 मीटर ऊंचाई तक फैला राख का गुबार; यहां दुनिया का छठा बड़ा भूकंप आया था

0
26

रूस के कामचटका में 600 साल बाद क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी में पहली बार विस्फोट हुआ। ​​​​​​कामचटका के इमरजेंसी मंत्रालय ने रविवार को बताया कि 2 अगस्त को इस ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ। मंत्रालय ने कहा- 1856 मीटर ऊंचे क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी में विस्फोट के बाद 6 हजार मीटर की ऊंचाई तक राख का गुबार फैल गया।’ इसके चलते इस इलाके का एयर स्पेस बंद कर दिया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस विस्फोट का संबंध 4 दिन पहले रूस के कामचटका आइलैंड में आए 8.8 तीव्रता के भूकंप से हो सकता है। रिंग ऑफ फायर के पास मौजूद है ज्वालामुखी इससे पहले बुधवार को कामचटका प्रायद्वीप पर स्थित क्ल्यूचेव्स्काया सोपका ज्वालामुखी में भी विस्फोट हुआ था। सोपका ज्वालामुखी यूरोप और एशिया में सबसे एक्टिव ज्वालामुखी है। यह दोनों ज्वालामुखी विस्फोट रूस के जिस इलाके में हुए हैं, वह रिंग ऑफ फायर के पास मौजूद है। रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है जहां कई कॉन्टिनेंटल के साथ ही ओशियनिक टेक्टोनिक प्लेट्स भी हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है, सुनामी उठती है और ज्वालामुखी फटते हैं। 75% एक्टिव ज्वालामुखी रिंग ऑफ फायर के पास दुनिया के 90% भूकंप इसी रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में आते हैं। यह क्षेत्र 40 हजार किलोमीटर में फैला है। दुनिया में जितने सक्रिय ज्वालामुखी हैं, उनमें से 75% इसी क्षेत्र में हैं। 15 देश इस रिंग ऑफ फायर की जद में हैं। कितने देशों में है रिंग ऑफ फायर का असर? जापान, रूस, फिलिपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, कनाडा, अमेरिका, मैक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पेरू, इक्वाडोर, चिली, बोलिविया। जुलाई में कामचटका में 6 ताकतवर भूकंप आए बुधवार का आया भूकंप दुनिया का छठा सबसे शक्तिशाली भूकंप था। इसके बाद रूस, अमेरिका, जापान और चिली समेत कई देशों ने सुनामी की चेतावनी जारी की थी। जापान ने अपने फुकुशिमा परमाणु रिएक्टर को खाली करा लिया था और टोक्यो में करीब 20 लाख लोगों को घर खाली करने का आदेश दिया गया था। जुलाई में ही कामचटका के पास समुद्र में 6 शक्तिशाली भूकंप आए थे। इनमें से दूसरे सबसे बड़े भूकंप की तीव्रता 7.4 थी। भूकंप का केंद्र जमीन से 20 किलोमीटर की गहराई में था। 4 नवंबर 1952 को कामचटका में 9 तीव्रता का भूकंप आया था। इससे कई इलाकों में 9.1 मीटर ऊंची लहरें उठी थी, हालांकि इसके बादजूद किसी की मौत नहीं हुई थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here