शिक्षा विभाग ने वार्षिक और बोर्ड परीक्षा के परिणाम को सुधारने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है। इन दोनों परीक्षाओं में कमजोर विद्यार्थियों को चिन्हित किया जाएगा और उनके लिए अलग से कक्षाएं लगाई जाएंगी। अगर इन परीक्षाओं में ज्यादा विद्यार्थी कमजोर निकलकर आए, तो उनकी तैयारी कराने में शिक्षकों को ज्यादा मेहनत करनी होगी।
