भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की चिंताओं को खारिज कर दिया। बांग्लादेश ने दावा किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के कुछ कार्यकर्ता भारत में उसके खिलाफ राजनीतिक एक्टिविटी कर रहे हैं। जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार को अवामी लीग के कार्यकर्ताओं की तरफ से भारत में बांग्लादेश के खिलाफ किसी गतिविधि की जानकारी नहीं है। भारत अपनी जमीन से किसी भी देश के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों की इजाजत नहीं देता है। जायसवाल ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के बयान को गलत बताया और कहा कि भारत चाहता है कि बांग्लादेश में जल्द से जल्द स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं, ताकि जनता की इच्छा पता चल सके। यूनुस सरकार की मांग- हसीना के ऑफिस बंद हो बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, यूनुस सरकार ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के ऑफिस को बंद करने की मांग की थी। उनके मुताबिक यह ऑफिस दिल्ली और कोलकाता में चल रहे हैं। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत में रह रहे अवामी लीग के नेताओं की गतिविधियां बांग्लादेश के लोगों और देश के खिलाफ हैं। यह बयान बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सेना अगले साल फरवरी में होने वाले स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में अंतरिम सरकार की मदद करेगी। बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी पर बैन बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अवामी लीग पर पिछले साल अक्टूबर में प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला आतंकवाद विरोधी कानून के तहत लिया गया है और तब तक लागू रहेगा, जब तक इंटरनेशनल क्रिमनल ट्रिब्यूनल में पार्टी और इसके नेताओं के खिलाफ मुकदमे पूरे नहीं हो जाते। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों ने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) बनाई है, जिसे यूनुस का समर्थन माना जा रहा है। कोटा सिस्टम से हुआ शेख हसीना का तख्तापलट बांग्लादेश में हाईकोर्ट ने पिछले साल नौकरियों में 30% कोटा सिस्टम लागू किया था, जिसके विरोध में छात्रों ने 5 जून 2024 को आंदोलन की शुरू किया। कोटा सिस्टम में सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू हुए, जो जल्द ही हिंसक हो गए। इस आंदोलन के दौरान एक हजार से ज्यादा लोगों की जान गई। आंदोलन का नतीजा ये हुआ कि शेख हसीना को 5 अगस्त को देश छोड़ना पड़ा। सैनिकों और राष्ट्रपति के मार्गदर्शन में नेशनल इमरजेंसी लागू कर अंतरिम सरकार का गठन हुआ। नोबल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस इस सरकार की अगुआई कर रहे हैं।
