हाई कोर्ट का अहम फैसला:खुद पैरवी कर दलीलें पेश की, तब 30 साल बाद जीता पीएचडी के दो इंक्रीमेंट का हक

0
21

रिटायर हो चुके सरकारी अधिकारी ने हाई कोर्ट में अपील पर अपनी पैरवी करते हुए मुकदमा जीता है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को वर्ष 1993 से दो वेतनवृद्धि का लाभ देने के आदेश दिए हैं। पीएचडी करने के बाद भी दो वेतनवृद्धि का लाभ नहीं मिलने पर उन्होंने याचिका लगाई थी, जिसे सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने अपील मंजूर करते हुए यह नवंबर 1993 को पीएचडी करने की तारीख से दो वेतनवृद्धि का लाभ देने के आदेश दिए हैं। बकाया राशि पर 6% ब्याज भी देने के आदेश दिए हैं। प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी करनी होगी। बिलासपुर निवासी रिटायर्ड ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नीलकमल गर्ग ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। बताया कि उनकी नियुक्ति 14 फरवरी 1983 को बैकुंठपुर, जिला सरगुजा (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी पद पर हुई थी। सेवा के दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने का निर्णय लिया। उप संचालक, कृषि, सागर से 10 अगस्त 1985 लेकर उन्होंने नवंबर 1993 में हिंदी विषय में पीएचडी की उपाधि ली। इसके बाद उन्होंने 1995 में शासन से अनुरोध किया कि नियमों के अनुसार पीएचडी करने पर उन्हें दो अग्रिम वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाए। लेकिन विभाग ने उनके आवेदन को नामंजूर कर दिया। हाई कोर्ट ने अपील मंजूर करते हुए कहा कि पीएचडी डिग्री हासिल करने वाले सरकारी कर्मचारी को दो अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ मिलना चाहिए। राज्य सरकार को आदेश दिया कि गर्ग को यह लाभ 1993 की तारीख से दिया जाए। इसके साथ ही बकाया राशि पर 6% साधारण ब्याज भी देने का निर्देश दिया गया है। राज्य सरकार के नियम में है शामिल: हाई कोर्ट ने कहा है कि गर्ग का 1985 का आवेदन और इस पर दी गई अनुमतिउच्च शिक्षा के लिए थी, जिसमें पीएचडी भी शामिल थी। राज्य सरकार ने पहले भी पीएचडी करने वाले कर्मचारियों को वेतनवृद्धि का लाभ दिया है। कई फैसलों में भी यह सिद्धांत तय हो चुका है कि सेवा के दौरान पीएचडी की डिग्री लेने पर दो वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाएगा। 2017 में लगाई याचिका
विभाग से बार- बार आग्रह करने के बाद भी निर्णय नहीं लेने पर गर्ग ने 2017 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई। 8 मई 2025 को सिंगल बेंच ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि पीएचडी की पढ़ाई की अनुमति सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं दी गई थी। इस आधार पर गर्ग को अग्रिम वेतनवृद्धि का हकदार नहीं माना गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here