अन्नू कपूर भी राज रखना चाहते हैं मौत की खबर:असरानी की राह पर चलने की जताई इच्छा, कहा- मैं दुनिया में बोझ बनकर नहीं जीना चाहता

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पॉपुलर एक्टर असरानी का 20 अक्टूबर को दिवाली के रोज निधन हो गया। उनके मैनेजर बाबूभाई थिबा ने दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उनकी आखिरी इच्छा थी कि उनकी मौत की खबर किसी को न दी जाए। यही वजह रही कि दोपहर में निधन के तुरंत बाद बिना किसी को खबर दिए उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिसमें परिवार के महज 15-20 लोग ही शामिल थे। अब सीनियर एक्टर अन्नू कपूर ने भी बिना किसी को बताए अंतिम संस्कार किए जाने की इच्छा जाहिर की है। अन्नू कपूर ने एएनआई से बातचीत में कहा है, ‘जब मेरा इस दुनिया नामक होटल से चेक आउट करने का समय आए और वह तिथि और वह समय अगर किसी राष्ट्रीय पर्व से जुड़ा हो, 15 अगस्त, 26 जनवरी से जुड़ा हो या किसी त्योहार से जुड़ा हो, दिवाली से जुड़ा हो, होली से जुड़ा हो, ईद से जुड़ा हो, मकर सक्रांति से जुड़ा हो, 12 वफात से जुड़ा हो, क्रिसमस से जुड़ा हो, बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ा हो, गुरु पूर्णिमा, नानक जयंती से जुड़ा हो तो मेरा भी यह जो संस्कार (अंतिम संस्कार) है वो गुप्त रूप से किया जाए।’ आगे उन्होंने कहा, ‘मैं किसी को परेशान नहीं करना चाहता हूं और मैं इस दुनिया पर बोझ बन कर नहीं जीना चाहता हूं। ना वो बोझ मैं अपने लिए चाहता हूं। ना मेरे लोगों के लिए चाहता हूं। ना समाज के लिए चाहता हूं। ना देश के लिए चाहता हूं। बोझ बन कर नहीं जीना। गालिब का एक शेर है कि गम हस्ती का असद किससे हो जुजमर्ग इलाज। गम हस्ती का असद किससे हो जुजमर्ग इलाज। शम्मा हर हाल में जलती है सैहर होने तक। तो जब तक चेक आउट होने का टाइम नहीं आया तब तक जलना अवश्य है। लेकिन जल के किसी को तकलीफ ना दें। जल जाने के बाद ना अपने परिवार को, ना अपनी पत्नी को, ना अपनी संतानों को, ना देश को, ना समाज को, ना दोस्तों को, ना इस समाज के लोगों को, ना अपने फैन को कोई तकलीफ नहीं देना चाहता। किसी पर बोझ बन कर नहीं जीना चाहता हूं।’ आखिर में उन्होंने कहा, जब मेरा समय आए चेक आउट करने का, दुनिया तो सराय है, मुसाफिरखाना है, ये होटल है। तो चेक इन किया है तो चेक आउट करना भी बहुत जरूरी है। या आप यह मत सोचना कि टिक जाओगे आप। यह परमानेंट रेजिडेंस नहीं है आपका। बड़े-बड़े लोगों ने इसको अपना परमानेंट रेजिडेंस बनाने की कोशिश की। लेकिन आज तक तो कोई बना नहीं पाया है। इसलिए प्रार्थना यही करो कि दूसरों को तकलीफ देकर ना जाओ और स्वयं को तकलीफ देकर नहीं जाओ।’ ‘मेरी मृत्यु जब हो जाने का समय है और वह तिथि इन त्योहारों पर पड़े तो मुझे भी बहुत गुप्त रूप से जिसे कहते हैं सुपुर्द आतिश या जिस मेरे घर वालों को जो भी कुछ मेरे इस नश्वर शरीर का करना है वह कर दिया जाए। किसी को बताया नहीं जाएगा।’ असरानी का भी हुआ गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार असरानी के साथ पिछले 20 सालों से काम कर रहे उनके मैनेजर बाबू भाई थिबा ने दैनिक भास्कर को बताया कि असरानी खुद चाहते थे कि उनकी मौत की खबर किसी को न दी जाए। उन्होंने ये इच्छा अपनी पत्नी मंजू बंसल के सामने जाहिर की थी। उन्होंने पत्नी से कहा था कि मेरी मौत के बाद कोई हंगामा न हो, जब अंतिम संस्कार हो जाए, तब ही सबको खबर देना। यही वजह रही कि महज परिवार की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसमें महज 15-20 लोग ही शामिल थे। इंडस्ट्री में खबर नहीं दी गई, जिससे इंडस्ट्री से जुड़ा कोई सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुआ।

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