नक्सल सरेंडर पर बैज बोले-सरकार के साथ क्या डील हुई:पूछा- क्या झीरम-2 की प्लानिंग है, साव बोले- कांग्रेस देश तोड़ने वालों के साथ

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छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के सरेंडर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार को घेरा है। बैज ने कहा कि कहा कि नक्सलियों के लगातार हो रहे आत्मसमर्पण के पीछे कहीं कोई बड़ी साजिश तो नहीं है। क्या सरकार झीरम 2 की तैयारी में है। सरकार और नक्सलियों के बीच आखिर कौन-सी शांति वार्ता हुई है? दीपक बैज ने कहा कि नक्सलियों के सरेंडर की खबरें लगातार आ रही हैं, लेकिन इसके पीछे सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सभी ऑपरेशन बंद कर दिए गए हैं। 200 नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे थे, तब CM और डिप्टी CM दोनों मौजूद थे, फिर वे मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर औपचारिकता क्यों निभाई गई? वहीं बैज के बयान पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा, कांग्रेस हमेशा देश तोड़ने वालों के साथ नजर आती है। प्रधानमंत्री ने जो बात कही है, वो कांग्रेसियों के समझ में आने वाली नहीं है। नक्सलियों को पांच साल तक कांग्रेस सरकार ने पाला-पोसा है। देश तोड़ने वालों के साथ इनका रिश्ता जगजाहिर है। सरेंडर के दौरान CM, डिप्टी CM क्यों नहीं पहुंचे- दीपक बैज दीपक बैज ने कहा कि जब जगदलपुर में 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, तब मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री वहीं मौजूद थे। वे जगदलपुर पहुंचे जरूर, लेकिन डेढ़ घंटे तक दंतेश्वरी एयरपोर्ट के एक बंद कमरे में चर्चा करते रहे। सवाल यह है कि जब वे शहर में थे, तो सरेंडर स्थल पर क्यों नहीं गए। नक्सली नेता रूपेश को मीडिया के सामने क्यों नहीं लाया गया- दीपक बैज बैज ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में सरेंडर हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री और मंत्री मौके पर नहीं पहुंचे। इसके बाद उन्होंने केवल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और वापस लौट आए। नक्सली नेता रूपेश उर्फ अभय को अब तक मीडिया के सामने क्यों नहीं लाया गया, जबकि स्थानीय मीडिया इस पर सवाल उठा रही है। 210 नक्सलियों का सरेंडर, 153 हथियार सौंपे थे जगदलपुर में 17 अक्टूबर को 210 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया था। 153 हथियार भी सौंपे गए थे। इनमें बस्तर में सरेंडर करने वाले 140 और कांकेर में पहले आत्मसमर्पण कर चुके 60 से ज्यादा नक्सली शामिल थे। इनमें महिला नक्सलियों की संख्या पुरुषों से अधिक रही। CM विष्णुदेव साय ने बताया था कि सरेंडर करने वालों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मकान, जमीन और तीन साल तक आर्थिक सहायता दी जाएगी। पुलिस लाइन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सभी नक्सलियों को भारतीय संविधान की किताब और एक गुलाब भेंट कर उनका स्वागत किया गया। पढ़ें पूरी खबर… अब जानिए झीरम हत्याकांड की पूरी कहानी ? दरअसल, 2013 के आखिर में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे। पिछले 2 चुनाव BJP ने बहुमत से जीते थे। रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। 10 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस जीत के लिए जोर लगा रही थी। पार्टी पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा शुरू करने वाली थी। 25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली की गई। रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। इसमें करीब 25 गाड़ियां थीं। इन गाड़ियों में 200 नेता-कार्यकर्ता थे। सबसे आगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे। उनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू की गाड़ी थी। उनके पीछे बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार चल रहे थे। यानी छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप इस काफिले में थी। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी में पहुंचा। यहीं नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। 200 से ज्यादा नक्सलियों ने की थी फायरिंग गाड़ियां रुकते ही 200 से ज्यादा नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग होती रही। शाम करीब 5:30 बजे नक्सली पहाड़ों से उतरकर नीचे आए और एक-एक गाड़ी चेक की। एक गाड़ी में उन्हें सलवा जुडूम आंदोलन शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा मिल गए। आंदोलन की वजह से नक्सली महेंद्र कर्मा को दुश्मन समझते थे। उन्होंने बेरहमी से महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी। उन्हें करीब 100 गोलियां मारी गईं। चश्मदीदों के मुताबिक, नक्सलियों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें गोली मारी। हमला पूरी योजना के साथ किया गया। नक्सलियों ने जगह का चुनाव, बम लगाने और भागने तक की पूरी तैयारी कर रखी थी। खुफिया एजेंसियों को हमले की कोई भनक नहीं थी। BJP सरकार पर लगे थे सुरक्षा में लापरवाही के आरोप कांग्रेस ने हमले को राजनीतिक साजिश बताकर BJP सरकार पर सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया। BJP ने आरोपों को खारिज कर कहा कि यह नक्सली हमला था। हमले के दो दिन बाद 27 मई, 2013 को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA को जांच सौंप दी गई। NIA ने सितंबर, 2014 में पहली चार्जशीट दाखिल की। एक साल बाद अक्टूबर 2015 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई। चार्जशीट के आधार पर जगदलपुर NIA कोर्ट में अब भी इस मामले का ट्रायल चल रहा है। हालांकि, NIA की जांच रिपोर्ट कभी सामने नहीं आई। ………………………………………… इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें 1. झीरम घाटी में 32 कत्ल, नक्सली हमला या सुपारी किलिंग: 12 साल से जांच ही चल रही, पीड़ित बोले- असली कातिल अब भी बाहर ‘मेरा बेटा मनोज सुबह सोकर उठा था। तभी तीन लोग बुलाने आए। बोले, फूल लेने जगदलपुर चलना है। बेटे ने मुझसे कहा- जगदलपुर जा रहा हूं। बस यही उससे आखिरी बात थी। मैं आखिरी बार उसका चेहरा भी नहीं देख पाई। आज भी लगता है कि वो आएगा और कहेगा- मम्मी, जल्दी से खाना दे दो।’ रंभा के बेटे मनोज को दुनिया से गए 12 साल हो गए, लेकिन बेटे का जिक्र होते ही उनकी आवाज में बेबसी महसूस होने लगती है। मनोज 25 मई, 2013 को सुकमा की झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में मारे गए थे। इस दिन नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर छत्तीसगढ़ कांग्रेस की टॉप लीडरशिप समेत 32 लोगों की हत्या कर दी थी। पढ़ें पूरी खबर… 2. भूपेश बोले-छत्तीसगढ़ में सरेंडर क्यों नहीं कर रहे नक्सली:पूर्व-सीएम ने नक्सल नीति पर पूछे सवाल; सीएम बोले-कांग्रेस ने ईमानदारी से नहीं किया काम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का दावा किया है। पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण भी हुए हैं। वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सरकार की नक्सल नीति पर सवाल उठाए हैं।पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को कहा कि नक्सलवाद खत्म करने के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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