छत्तीसगढ़ में ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इस वजह से ठंड बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 2 दिनों में प्रदेशभर में न्यूनतम तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। फिलहाल, मौसम में ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है। प्रदेश में मौसम ड्राई बना हुआ है। पिछले 24 घंटों में भी प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान 30.6°C दुर्ग और जगदलपुर में, जबकि सबसे कम तापमान 10.9°C अंबिकापुर में दर्ज किया गया। वहीं कल यानी 10 नवंबर के लिए उत्तर छत्तीसगढ़ (सरगुजा संभाग) के एक-दो स्थानों पर शीत लहर चलने की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों से रायपुर में दिन का तापमान लगातार प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है। वहीं सूरज ढलते ही तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, स्कूली बच्चों काे गर्म कपड़े साथ रखने चाहिए। ताकि अचानक तापमान गिरने का असर तबीयत पर न पड़े। जानिए कहां कैसा रहेगा मौसम किसानों और शहरों के लिए संकेत डॉक्टर बोले- सतर्क रहना जरूरी, ये मौसम बीमारी ला सकता है डॉ विकास अग्रवाल ने (एमडी, मेडिसिन) बताया कि जिस तरह से तापमान बदल रहा है, बीमार होने का खतरा ज्यादा। खासकर ऐसे मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में बीमारी से बचने सतर्क रहना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह है कि… 2. पानी जमा न होने दें 3. शरीर को ढककर रखें 4. समय पर जांच और इलाज कराएं बार-बार हाेने वाले मलेरिया का संकट ज्यादा मौसम विभाग की हेल्थ एडवाइजरी के अनुसार 7 नवंबर से 11 नवंबर 2025 के बीच भारत में मलेरिया फैलने की संभावित स्थिति को दिखाता है। इसे मौसम के आधार पर तैयार किया गया है, क्योंकि मलेरिया के मच्छर तापमान के हिसाब से फैलते हैं। मलेरिया फैलने का आधार ऐसा तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल होता है। छत्तीसगढ़ में तापमान अभी इसी तरह का हो रखा है। यानी छत्तीसगढ़ में मलेरिया फैलने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। अगले आठ दिनों में मलेरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण/जंगल क्षेत्रों में। 2 तरह के मलेरिया का खतरा इन राज्यों में भी जोखिम अक्टूबर में अब तक 59 फीसदी ज्यादा बारिश छत्तीसगढ़ से मानसून 15 अक्टूबर तक लौट गया। मानसून सीजन 30 सितंबर को ही खत्म माना जाता है। इसलिए अक्टूबर में होने वाली बारिश को मौसम विभाग सालाना वर्षा के रूप में रिकॉर्ड करता है। इस साल अब तक 1 से 26 अक्टूबर तक 89.4 मिमी पानी गिर चुका है। ये औसत से 59 फीसदी ज्यादा है। …………………………….. मौसम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… बारिश से कटी फसल बर्बाद देख गिर पड़ा किसान: कवर्धा में खेतों में भरा पानी, मोन्था कमजोर पड़ने से आज से मौसम सामान्य होगा;तापमान चढ़ेगा छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों में चक्रवात मोन्था के कारण रायपुर, कवर्धा, बिलासपुर, रायगढ़ और सरगुजा समेत कई जिलों में बारिश हुई। शुक्रवार को कवर्धा में पानी बरसा, जिससे खेतों में पहले से कटी हुई फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। नुकसान देखकर किसान खेत में ही टूट गया और गिर पड़ा। पढ़ें पूरी खबर
