कोर्ट ने साफ किया था कि आक्षरण का समुचित लाभ तय करने के लिए उच्च पदों पर पहुंचे अधिकारियों का डेटा आवश्यक है। जब तक क्रीमीलेयर के वास्तविक आंकड़े नहीं जुटाए जाते, तब तक यह पता करना कठिन है कि पिछड़े वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है या नहीं। लिहाजा, प्रमोशन में आरक्षण देने से पहले सरकार को यह साबित करना होगा कि संबंधित वर्गों का प्रतिनिधित्व कम है।
