धर्मेंद्र को बैडमिंटन खेलने का शौक था:मद्रास में शूटिंग के दौरान के.सी. बोकाड़िया ने 24 घंटे में ग्राउंड बनवाया, तो बहुत खुश हुए एक्टर

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हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र (89) का सोमवार सुबह जुहू स्थित उनके घर में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और उनका इलाज चल रहा था। सोमवार दोपहर को मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। धर्मेंद्र के निधन के बाद प्रोड्यूसर-डायरेक्टर के.सी. बोकाड़िया ने दैनिक भास्कर से बातचीत में धर्मेंद्र को याद किया और उनके बारे में कई किस्से शेयर किए। के.सी. बोकाड़िया ने बताया कि वे बड़े अच्छे स्वभाव के थे। बहुत अच्छे इंसान और बहुत अच्छे आर्टिस्ट थे। उनके साथ कभी पैसों की दिक्कत नहीं होती थी। उनके साथ कभी एग्रीमेंट होता ही नहीं था। वे अक्सर कहते थे कि बोकाड़िया साहब! क्या साथ लेकर जाएंगे, अल्टीमेटली तो ये बातें ही रह जानी है। मैं कोशिश करता हूं कि मेरी वजह से किसी को ठेस नहीं पहुंचे। जबान से किसी पर वार नहीं करता हूं। धर्मेंद्र को बैडमिंटन खेलने का बेहद शौक था के.सी. बोकाड़िया ने बताया कि मद्रास में शूटिंग करने के दौरान वे मेरे बंगले पर बैडमिंटन खेलने आते थे। दरअसल धर्मेंद्र जब मद्रास में फिल्म ‘इंसाफ कौन करेगा’ की शूटिंग करने आए थे, तब पता चला कि वे बैडमिंटन खेलने का शौक हैं। उनके लिए 24 दिन के अंदर अपने बंगले में बैडमिंटन ग्राउंड बनवा दिया। इस बात से वे खुश होकर बोले- बोकाड़िया साहब! आपने तो कमाल कर दिया। वे मेरे घर पर ही वेजीटेरियन खाना खाते थे। मैं कहता था कि सॉरी सर! मैं नॉनवेज देता नहीं हूं, तब वे कहते थे कि जाट आदमी हूं। वैसे भी नॉनवेज कहां पसंद करता हूं। आप जो खिलाएंगे, खा लूंगा। मैं अन्न की कद्र करता हूं। मैं इन बातों में उलझता नहीं हूं। बहुत सिंपल इंसान थे। धर्मेंद्र को लेकर के.सी. बोकाड़िया ने यह भी बताया कि फिल्म ‘इंसाफ कौन करेगा’ की शूटिंग थी। उसमें जीवन कुमार के बेटे किरण कुमार कास्ट किए गए थे। सीन के मुताबिक धर्मेंद्र को किरन कुमार पर थप्पड़ मारना था। चूंकि जीवन और धर्मेंद्र अच्छे दोस्त थे, इसलिए धर्मेंद्र ने कहा कि अपने दोस्त के बेटे किरण कुमार को कैसे थप्पड़ मारूंगा। इस फिल्म की शूटिंग के लिए हम पुष्कर गए थे। वहां पर 600 ऊंट के साथ शूट करना था। धर्मेंद्र ने एक ऊंट पर सवार होकर सैर करने चले गए, जब बड़ी देर तक वापस नहीं आए, तब कुछ ऊंटों पर सवार होकर उन्हें ढूंढने निकले। दूर से देखा कि वे हीरो की तरह एक टीले की तरफ से आ रहे हैं। वे पास आकर बोले- बेवकूफ हो क्या! धर्मेंद्र खो जाएगा क्या! धर्मेंद्र मरेगा, तब भी नहीं खोएगा। लोगों के दिलों में घुसा हुआ हूं। मुझे ढूंढना है, तब लोगों के दिलों में ढूंढो, यहां टीलों में क्या ढूंढते हो।

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