पाकिस्तान को 12 राज्यों में बांटने की तैयारी:भुट्टो की पार्टी विरोध में, कहा- अल्लाह के अलावा कोई सिंध को बांट नहीं सकता

0
12

पाकिस्तान के चारों प्रांतों को 12 हिस्सों में बांटने की तैयारी चल रही है। देश के संचार मंत्री अब्दुल अलीम खान ने कहा है कि देश में छोटे-छोटे प्रांत बनना अब तय है। उनका कहना है कि इससे शासन बेहतर होगा। अब्दुल अलीम खान रविवार को शेखूपुरा में इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) के कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि सिंध और पंजाब में तीन-तीन नए प्रांत बनाए जा सकते हैं। ऐसा ही विभाजन बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में भी हो सकता है। अलीम खान ने कहा कि हमारे आसपास के देशों में कई छोटे प्रांत हैं। इसलिए पाकिस्तान में भी ऐसा होना चाहिए। अलीम खान की पार्टी IPP पीएम शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार का हिस्सा है। हालांकि बिलावल भुट्टो की पार्टी PPP ने इसका विरोध किया है। सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने धमकी देते हुए कहा कि अल्लाह के सिवा कोई भी सिंध को बांटने की ताकत नहीं रखता। कौन-कौन से नए प्रांत बन सकते हैं? पाकिस्तान सरकार की तरफ से अभी आधिकारिक नक्शा जारी नहीं किया गया है, लेकिन जिन इलाकों की चर्चा है, वे कुछ इस तरह हैं- बिलावल की पार्टी बंटवारे के खिलाफ शहबाज सरकार में शामिल बिलावल भुट्टो की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने साफ कहा है कि सिंध को बांटने का किसी भी कीमत पर विरोध किया जाएगा। PPP लंबे समय से खासकर सिंध के बंटवारे का विरोध करती रही है। पिछले महीने सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने साफ चेतावनी दी थी कि सिंध के हितों के खिलाफ कोई कदम स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि PPP अपने प्रांत या देश के हितों के खिलाफ किसी भी कदम को कभी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि नए राज्य बनने की अफवाहें चल रही हैं। लेकिन इसे एक कान से सुनें और दूसरे से निकाल दें। अल्लाह के सिवा कोई भी सिंध को बांटने की ताकत नहीं रखता। नए प्रांतों की मांग पहले भी उठती रही है, लेकिन कभी मुकाम तक नहीं पहुंची। पाकिस्तान में 1947 के वक्त पांच प्रांत थे। इनमें पूर्वी बंगाल, पश्चिमी पंजाब, सिंध, नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविंस (NWFP) और बलूचिस्तान शामिल थे। 1971 में पूर्वी बंगाल अलग होकर आज का बांग्लादेश गया। बाद में NWFP का नाम बदलकर खैबर पख्तूनख्वा रखा गया। इस बार प्रस्ताव को कुछ थिंक-टैंक और मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान (MQM-P) जैसी पार्टियों ने भी समर्थन दिया है। कई छोटी पार्टियां भी विरोध में PPP के अलावा कई छोटे दल भी इस बंटवारे के विरोध में हैं। अवामी नेशनल पार्टी (ANP) और बलूच राष्ट्रवादी दलों ने इसे बांटो और राज करो की नीति बताया है। इन लोगों का कहना है कि छोटे प्रांत बनाने से स्थानीय पहचान और संस्कृति कमजोर हो सकती है। बड़े प्रांतों की राजनीतिक ताकत टूट जाएगी। सेना और केंद्र सरकार की पकड़ और मजबूत हो जाएगी। इसके अलावा बलूचिस्तान जैसे इलाकों में तनाव और भड़क सकता है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम देश की पहले से अस्थिर राजनीति को और उलझा सकता है। नए प्रांत बनाने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी कई पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि पाकिस्तान के सत्ता ढांचे में पिछले कुछ सालों में सेना का प्रभाव बढ़ा है। ऐसे में प्रांतों को बांटने का फैसला प्रशासनिक सुधार से ज्यादा राजनीतिक कंट्रोल बढ़ाने की रणनीति भी हो सकती है। नए प्रांत बनाने के लिए संविधान में संशोधन जरूरी है और उसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। अगर पाकिस्तान 12 प्रांतों में बंटता है, तो देश का प्रशासनिक ढांचा, राजनीति और संसाधन-बंटवारा पूरी तरह से बदल जाएगा। एक्सपर्ट बोले- ज्यादा प्रांत मतलब ज्यादा दिक्कतें पाकिस्तान के वरिष्ठ अफसर और पुलिस अधिकारी रहे सैयद अख्तर अली शाह का कहना है कि सिर्फ प्रांत बढ़ाने से समस्याएं हल नहीं होंगी। उनका कहना है, पाकिस्तान की समस्या प्रांतों की संख्या नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की खामियां हैं। अगर ये दुरुस्त नहीं हुईं, तो नए प्रांत बनाना हालात और बिगाड़ सकता है। अली शाह के मुताबिक कमजोर संस्थाएं, कानून का असमान लागू होना, जवाबदेही की कमी और स्थानीय सरकारों को अधिकार न देना देश की असली समस्याएं हैं। थिंक टैंक PILDAT के प्रमुख अहमद बिलाल महबूब ने भी कहा कि पुराने अनुभव बताते हैं कि प्रशासनिक फेरबदल ने गिले-शिकवे बढ़ाए ही हैं। उनके मुताबिक नए प्रांत बनाना खर्चीला, राजनीतिक रूप से विवादित और जटिल कदम होगा। असली जरूरत स्थानीय सरकारों को मजबूत करने की है। ———————- पाकिस्तान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… आसिम मुनीर की धमकी- भारत गलतफहमी में न रहे:अब हमला हुआ तो पाकिस्तान भी कड़ा जवाब देगा, किसी को परखने की अनुमति नहीं देंगे पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) बने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने सोमवार को अपना पद संभाल लिया। रावलपिंडी के GHQ में हुए कार्यक्रम में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here