90 के दशक से लाल आतंक का दंश झेल रहे बालाघाट से माओवाद का पूर्ण सफाया हो गया है। गुरुवार को आखिरी बचे दीपक और रोहित ने भी अपने साथियों की तरह हथियार डाल दिए हैं। हालांकि, पुलिस की तरफ से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस के विश्वस्त सूत्र के मुताबिक, दीपक और रोहित कोरका स्थित सीआरपीएफ कैम्प में आत्मसमर्पण कर दिया है।
