अचानक उसका ट्रांसफर सीधे सीएमएचओ कार्यालय कर दिया गया। स्थिति तब और संदिग्ध हुई जब कार्यालय के बजाय उसे सीएमएचओ के घर पर भोजन बनाने की ड्यूटी दे दी गई। पीड़िता के अनुसार खाना बनाते समय अकेला पाकर सीएमएचओ उसे पकड़ते थे, और डबल मीनिंग बातें करते थे। इसका विरोध करने पर भी वे अपने पद का दबाव बनाते रहे।
