मेरे बेटे ने फोन कर बोला कि मां ईद के दिन मुझे ईदी मत देना। मुझे आज 300 रुपए दे दो। फिर मैं बोली कि तुम्हें पैसा कैसे दूं। तो मेरा बेटा बोला कि मैं एक मोबाइल नंबर भेज रहा हूं। उसमें भेज देना मैं ले लूंगा। कुछ देर बाद फिर शोएब ने अपनी मां मुन्नी को फोन करके कहा कि मैं घर वापस नहीं आता हूं तो शेखर साहू, मुकेश यादव के नाम से थाने में रिपोर्ट कर देना। 8 अप्रैल 2024 को शोएब खान (22) का मां को यह अंतिम फोन कॉल था। इसके बाद अगले 5 दिनों तक मां अपने बेटे की तलाश करते रही, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। 11 अप्रैल को मां ने कबीर नगर पुलिस में भी शिकायत दी। गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रही थी। तभी रायपुर से करीब 175 किलोमीटर दूर कोरबा के पाली थाना इलाके के जंगल में एक चरवाहे ने अधजली लाश देखी। उसने कोरबा पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने हुलिया के आधार पर आसपास के जिलों के पुलिस थाने में गुमशुदगी की फाइलें खंगालना शुरू किया। उम्र, कपड़े और पैरों में पहने हुए अधजले जूते की तस्वीर रायपुर पुलिस के पास पहुंची। मुन्नी खान ने अपने बेटे के सामान को पहचान लिया। पुलिस फौरन कोरबा के लिए रवाना हुई। इधर शोएब खान ने अपनी मां के साथ अंतिम कॉल में जिस शेखर साहू, मुकेश यादव का नाम लिया था। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। दोनों आरोपी फरार थे। पुलिस का शक बढ़ गया। पुलिस ने बिहार के मधुबनी जिले से चंद्रशेखर को हिरासत में लिया। उससे कड़ाई से पूछताछ की। आरोपी पुलिस की सख्ती के सामने टूट गया। उसने मुकेश यादव के साथ मिलकर हत्या की बात कबूल कर ली। अब रायपुर कोर्ट ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अब जानिए क्यों हुई शोएब की हत्या ? पुलिस ने जब मृतक का मोबाइल डिटेल निकाला तो अंतिम फोन कॉल संदिग्ध चंद्रशेखर साहू का ही दिखाया। चंद्रशेखर ने बताया कि शोएब खान ई-रिक्शा चलाता था। वो अपनी मौसी से मिलने के लिए धरसीवां आता रहता था। पड़ोस में चंद्रशेखर का भी घर है। वहीं से शोएब की पहचान चंद्रशेखर और उसकी पत्नी से हुई थी। इसी बीच शोएब ने चंद्रशेखर से कुछ रुपए लिए थे। जिसे वापस नहीं करने पर दोनों के बीच विवाद था। पहले गला दबाया, फिर आंखें फोड़ दी इसके बाद चंद्रशेखर ने अपने दोस्त मुकेश कुमार यादव के साथ शोएब की हत्या की प्लानिंग की। उन्होंने फोन करके शोएब को मिलने के लिए बुलाया। फिर दोनों ने धरसींवा के पास शोएब को जमकर शराब पिलाई। वहां से उसका किडनैप करके कुछ दूर ले गए, फिर नशे की हालत में उसका गला दबा दिया। जिससे शोएब की मौके पर मौत हो गई। हत्यारे यहीं पर नहीं रुके उन्होंने गाड़ी के पाने से उसकी आंख फोड़ दी। 175 किलोमीटर सीट कवर में ढक कर ले गए लाश दोनों आरोपी जानते थे कि लाश मिलने के बाद पुलिस हत्या के मामले में तेजी से खोजबीन करेगी। उन्होंने शोएब की लाश को ठिकाने लगाने बिहार ले जाने की प्लानिंग की। चंद्रशेखर टाटा मैजिक गाड़ी चलाता था। उसने अपने ही गाड़ी में प्लास्टिक कवर में लाश छिपा दी, फिर दोनों लाश लेकर कोरबा की तरफ बढ़ गए। ज्यादा पैसे नहीं होने से कोरबा तक ही जा पाए आरोपी इस बीच रास्ते में कोरबा का जंगल मिला, आरोपियों के पास डीजल के लिए ज्यादा पैसे भी नहीं थे जिससे वे बिहार जा पाए। उन्होंने रास्ते में प्लास्टिक बोतल में पेट्रोल खरीद लिया, फिर कोरबा के पाली थाना के एक जंगल पहुंच गए। वहां पर नाले के पास लाश को रखकर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। यही अधजली लाश और शोएब का अधजला जूता पाली पुलिस को मिला और मामले का खुलासा हुआ। एक अधजला जूता कोरबा में एक रायपुर में मिला इस मामले में सबसे बड़ा सबूत शोएब का अंतिम फोन कॉल बना जिसमें उसने अपनी मां को दोनों आरोपियों से खतरा बताया था। वहीं शोएब की पहचान उसके एक अधजले जूते से हुई। उसका दूसरा जूता पुलिस को धरसींवा के उस जगह से मिला जहां पर शोएब को शराब पिलाकर मारा गया था। इसके अलावा 2 लीटर वाली कोल्डड्रिंक की प्लास्टिक बॉटल जिसमें आरोपियों ने पेट्रोल भरा था। व्हील पाना, माचिस और प्लास्टिक के कुछ टुकड़े जो मालवाहक गाड़ी के थे। इन सब समानों ने केस की गुत्थी को आसान बना दिया। रायपुर कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा इस मामले में पुलिस ने करीब 25 गवाहों के स्टेटमेंट को कोर्ट के सामने पेश किया। आरोपियों ने भी अपना जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद कोर्ट ने हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, किडनैपिंग की धाराओं में सजा सुनाई। जिसमें आरोपियों को हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
