कार्य परिषद ने यह भी माना कि कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी से विश्वविद्यालय नए कानूनी विवादों में उलझ सकता है और उसकी अकादमिक साख पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए परिषद ने कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई और बहाली प्रक्रिया के लिए फाइल औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने की स्वीकृति दी।
