छत्तीसगढ़ ने बनाया ग्रीन-कॉरिडोर, देवा ने तेलंगाना में किया सरेंडर:इजराइल मेड ‘तावोर’ राइफल, अमेरिकी ‘कॉल्ट-M4’, 20 लाख कैश सौंपा, झीरम हमले का सच बताएगा

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हिड़मा के सबसे करीबी साथी देवा बारसे (49) ने शनिवार को तेलंगाना के हैदराबाद में सरेंडर कर दिया है। बस्तर में नक्सलियों की सबसे खतरनाक टीम बटालियन नंबर 1 का कमांडर इन चीफ देवा बारसे गुरिल्ला आर्मी में माहिर 19 साथियों के साथ तेलंगाना पहुंचा था। देवा आधुनिक तकनीक से लैस इजराइल मेड वेपन तावोर (tavor) असॉल्ट राइफल और अमेरिकन मेड राइफल कॉल्ट M4 अपने साथ लेकर आया। दावा है पहली बार बटालियन टीम से ये विदेशी बंदूकें बरामद की गई हैं। अमूमन भारत में तावोर राइफल इंडियन आर्मी, CRPF और कोबरा के जवानों के पास होती है। AK-47 के मुकाबले इसे ज्यादा सटीक माना जाता है। जबकि, US मेड कॉल्ट M4 भारत में फोर्स के पास न के बराबर है। नक्सलियों ने 20 लाख 30 हजार रुपए कैश भी पुलिस को सौंपे हैं। अब तावोर और कॉल्ट जैसी विदेशी राइफल मिलने से इस बात का भी संकेत है कि हथियार सप्लाई में नक्सलियों का नेटवर्क काफी बड़ा रहा है। यह सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा रहा है। हिड़मा के एनकाउंटर बाद देवा नवंबर में ही सरेंडर करना चाहता था। इसके लिए उसने संदेश भिजवाया था। नवंबर के अंतिम सप्ताह में सुकमा जिले में ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया गया। तब जानकारी ये थी कि, 3 से 4 दिनों तक जवानों का ऑपरेशन रोका गया। हालांकि, पुलिस के किसी भी अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की थी। वहीं देवा बस्तर में सरेंडर नहीं किया और सीधे तेलंगाना की तरफ चला गया। देवा को साल 2023 में बटालियन नंबर 1 का चीफ बनाया गया था। इससे पहले वह दरभा डिवीजन का सचिव था। साल 2013 में इसी दरभा घाटी में झीरम में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर नक्सलियों ने हमला किया था। अब देवा के सरेंडर के बाद पूछताछ में झीरम हमले का राज भी खुल सकता है। पहले देखिए ये तस्वीरें- बाकी बचे नक्सलियों से सरेंडर की अपील तेलंगाना के डीजीपी ने कहा कि यह सरेंडर सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति की सफलता है। उन्होंने बाकी बचे नक्सलियों से भी हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। देवा के बारे में जानिए दरअसल, देवा बारसे (49) सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का रहने वाला है। ये माड़वी हिड़मा का सबसे करीबी साथी था। हिड़मा ने ही इसे साल 2023 में बटालियन नंबर 1 का कमांडर इन चीफ बनाया था। वहीं 18 नवंबर को हिड़मा के एनकाउंटर के बाद इसने संगठन छोड़ने का निर्णय ले लिया था। किसी माध्यम से देवा ने सरेंडर करने का संदेश जंगल से बाहर भी भिजवाया था। तब दैनिक भास्कर ने ही देवा के सरेंडर करने का खुलासा किया था और देवा के सरेंडर के बाद दैनिक भास्कर डिजिटल की खबर पर मुहर लग गई। 1 जनवरी को देवा तेलंगाना पहुंच गया था 1 जनवरी को देवा तेलंगाना के मुलुगु जिले में पहुंच गया था। वह अपने 19 साथी और करीब 48 हथियार लेकर आया। जिसके बाद पुलिस उन्हें यहां से हैदराबाद लेकर गई। 3 जनवरी को तेलंगाना DGP के सामने ऑफिशियल रूप से सरेंडर करवाया गया। तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र इन 3 राज्यों की पुलिस फोर्स ने सिर्फ देवा पर 75 लाख रुपए का इनाम रखा था। तावोर राइफल की खासियत सरेंडर के दौरान जमा कराई गई तावोर असॉल्ट राइफल को दुनिया की आधुनिक और घातक राइफलों में गिना जाता है। इसका इस्तेमाल भारतीय सेना और विशेष बल करते हैं। अधिकारियों के अनुसार इसी हथियार के जरिए नक्सली सुरक्षाबलों को भारी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते थे। तावोर राइफल की खासियत इसकी ज्यादा सटीकता, कम रीकॉइल और जंगल में आसान मूवमेंट मानी जाती है। सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो इस हथियार की मौजूदगी नक्सलियों की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देती थी और यही वजह थी कि यह उनके लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम थी। कॉल्ट M4 राइफल की खासियत कॉल्ट M4 लंबे समय से अमेरिकी सेना और NATO फोर्सेस की मानक राइफल रही है, जिसे आधुनिक युद्ध के लिए विकसित किया गया है। कम वजन और छोटी लंबाई के कारण यह शहरी इलाकों, जंगल और क्लोज-कॉम्बैट ऑपरेशन में ज्यादा प्रभावी मानी जाती है।
M4 अपनी उच्च सटीकता के लिए जानी जाती है, जिससे कम और मध्यम दूरी पर लक्ष्य भेदने में आसानी होती है। इस राइफल पर रेड डॉट, स्कोप, लेजर साइट और अन्य आधुनिक उपकरण आसानी से लगाए जा सकते हैं, जिससे ऑपरेशनल क्षमता बढ़ती है। बस्तर में 200 से 300 नक्सली बचे नक्सल संगठन में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 से 300 आर्म कैडर के नक्सली ही बचे हुए हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। नक्सलियों का महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह से खत्म हो गया है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है। अब फोर्स के लिए इन 90 दिनों में दक्षिण बस्तर डिवीजन को नक्सल मुक्त करना ही सबसे बड़ी चुनौती है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर के जंगलों में ही पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में है। कुछ समय पहले देवजी की लोकेशन तेलंगाना-आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन में थी। हालांकि वह बार-बार ठिकाने बदल रहा है। इन 90 दिनों में अगर ये 5 से 6 बड़े नक्सली मारे जाते हैं या सरेंडर करते हैं तो बस्तर के फ्रंट लाइन के सभी टॉप लीडर्स खत्म हो जाएंगे।
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