Mahabharat Katha: कर्ण और दुर्योधन की मित्रता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक सच्चा मित्र केवल सुख में ही नहीं, बल्कि विनाश के द्वार पर भी साथ खड़ा रहता है। कर्ण भली-भांति जानते थे कि दुर्योधन अधर्म के पथ पर है, फिर भी उन्होंने अंत तक अपनी वफादारी नहीं छोड़ी।
