विदेशी भाषाओं के महत्व को समझने और देश-विदेश के विद्यार्थियों को एक-दूसरे की भाषाओं से जोड़ने के लिए यह पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को देश-विदेश में नौकरियां प्राप्त करने में आसानी होगी। महाविद्यालयों में तेलुगू, तमिल, कन्नड, मराठी, मलयालम, सिंधी, मणिपुरी, ओड़िया, असमी, बांग्ला, पंजाबी और गुजराती पढ़ाने की योजना पहले ही तैयार की जा चुकी है।
