छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का डेटा बेस्ड नेटवर्किंग मॉडल:मार्केटिंग की तरह चल रहा था कन्वर्जन सिंडिकेट, अनाथ-विधवा और फुटपाथ पर रहने वाले थे टारगेट

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छत्तीसगढ़ में सामने आए धर्मांतरण के मामलों में इस बार जो तस्वीर उभरकर आई है, वह किसी एक गांव, चर्च या प्रार्थना सभा तक सीमित नहीं है। जांच में यह मामला एक संगठित कन्वर्जन नेटवर्क से जुड़ा पाया गया है, जिसमें लोगों को जोड़ने, उन्हें ट्रेनिंग देने और प्रमोशन तक का पूरा सिस्टम तैयार किया गया था। इस मॉडल में धर्म नहीं, बल्कि इंसानों को टारगेट की तरह देखा गया। इस नेटवर्क का मुख्य फोकस समाज के सबसे कमजोर तबकों पर था। अनाथ बच्चे, विधवा महिलाएं, भिखारी और फुटपाथ पर रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें नेटवर्क से जोड़ा जाता था और धीरे-धीरे मानसिक रूप से तैयार किया जाता था। पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करने की जिम्मेदारी डेविड चाको के पास थी। राजनांदगांव जिले के धर्मापुर गांव में बनाए गए आश्रम और चर्च की इमारत को नेटवर्क का ऑपरेशनल बेस बनाया गया था। यहीं से पूरे प्रदेश में कन्वर्जन से जुड़ी गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग, टारगेट तय करने और प्लानिंग की जाती थी। मामले में पुलिस ने डेविड चाको के खिलाफ छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 3, 4 और 5 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस रिपोर्ट में पढ़िए, कैसे डेविड चाको ने कमजोर वर्गों को टारगेट बनाकर पूरे प्रदेश में धर्मांतरण का नेटवर्क तैयार किया:- पहले ये दो तस्वीर देखिए… धर्मापुर: शांत गांव, जहां बाहर से देखने पर सब सामान्य लगता है दैनिक भास्कर की टीम जब धर्मापुर गांव पहुंची, तो पहली नजर में यह गांव किसी बड़े विवाद का केंद्र नहीं लगा। करीब 650 की आबादी वाला यह छोटा सा गांव चारों तरफ खेतों और कच्चे-पक्के रास्तों से घिरा है। दोपहर के वक्त गांव का चौराहा शांत था। कुछ लोग पेड़ की छांव में बैठे थे, वहीं से बातचीत शुरू हुई। गांव में कोई हड़बड़ी नहीं थी, न कोई पुलिस की तैनाती, न कोई तनाव। लेकिन बातचीत शुरू होते ही साफ हो गया कि पुलिस की रेड के बाद गांव में यह चर्चा जरूर फैल चुकी है कि यहां से पूरे प्रदेश का कन्वर्जन नेटवर्क ऑपरेट हो रहा था। गांव वालों से दूरी बनाए रखते थे गांव के चौराहे पर मिले पुंदेव शर्मा ने बताया कि डेविड चाको और उसके साथ रहने वाले लोग गांव के किसी भी व्यक्ति से ज्यादा बातचीत नहीं करते थे। उन्होंने कहा कि कुछ नाबालिग लड़के और लड़कियां उनके साथ रहते थे, जो गांव के स्कूल में पढ़ते थे। साथ बैठे हेमंत नेताम ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि डेविड चाको किसी बड़े कन्वर्जन नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। गांव के युवक खिलेश्वर बघेल ने बताया कि डेविड चाको की गतिविधियां उन्हें पहले से ही संदिग्ध लगती थीं। उनके यहां रोजाना लोग आते-जाते थे, लेकिन यह आवाजाही ज्यादातर रात के समय होती थी। जमीन से मकान तक की पूरी टाइमलाइन इसके बाद भास्कर की टीम ग्राम पंचायत पहुंची, जहां सरपंच कोमल सिंह टंडन से मुलाकात हुई। पंचायत भवन में बैठे टंडन ने पूरी टाइमलाइन विस्तार से बताई। सरपंच के मुताबिक, डेविड चाको मार्च 2022 में उनके पास आया था। उसने बताया था कि वह राजनांदगांव के नेहरू नगर का रहने वाला है और शहर छोड़कर गांव में बसना चाहता है। उसने गांव में किसी किसान से जमीन खरीदने की इच्छा जताई थी और मकान निर्माण के लिए आवेदन दिया था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायत की ओर से उसे एनओसी दी गई। टंडन ने बताया कि जमीन लेने में करीब छह से सात महीने का वक्त लगा और उसके बाद मकान बनने में चार से पांच साल लग गए। अक्टूबर महीने में मकान की ओपनिंग हुई, जिसके बाद डेविड चाको यहां आकर रहने लगा। नाबालिग बच्चे और उनकी कहानी गांव में चर्चा का एक बड़ा विषय वे नाबालिग बच्चे हैं, जो डेविड चाको के साथ रहते थे। गांव वालों ने बताया कि ये बच्चे पहले गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चमेली साहू के घर किराए पर रहते थे। इसकी पुष्टि के लिए भास्कर की टीम चमेली साहू के घर पहुंच। चमेली ने बताया कि जुलाई 2023 में डेविड चाको चार बच्चों को लेकर उनके घर आया था। उसने कहा था कि इन बच्चों की पढ़ाई गांव में करानी है और दो महीने तक किराए पर रहने की बात कही थी। चमेली के मुताबिक, दो महीने की बात कहकर करीब दो साल गुजर गए। बच्चे उनके घर में ही रहते रहे। बाद में, अक्टूबर महीने में जब डेविड चाको की बिल्डिंग बन गई, तब बच्चों को वहां शिफ्ट कर दिया गया। कौन थे ये बच्चे चमेली साहू ने बताया कि उनके घर में तीन नाबालिग लड़कियां और एक लड़का रहते थे। दो लड़कियां पास के सरकारी स्कूल में पढ़ती थीं, जिनमें से एक 10वीं और दूसरी 11वीं कक्षा में थी। लड़का गांव के ही प्राथमिक स्कूल में 6वीं कक्षा में पढ़ता था। चमेली ने बताया कि दो साल तक साथ रहने के बावजूद बच्चे किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करते थे। कौन है डेविड चाको, जिसके हाथ में था पूरे नेटवर्क का संचालन पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे कन्वर्जन नेटवर्क को ऑपरेट करने वाला डेविड चाको मूल रूप से केरल के एरनाकुलम जिले का रहने वाला है। बीते कई वर्षों से वह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में रह रहा था और यहीं से उसकी गतिविधियां संचालित हो रही थीं। पुलिस के मुताबिक डेविड चाको का लाइफ पैटर्न सामान्य स्थानीय व्यक्ति जैसा नहीं था। जानकारी के अनुसार वह छह महीने भारत और छह महीने अमेरिका में रहता था, जिससे उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस को डेविड चाको की कई तस्वीरें और डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं, जिनमें वह प्रार्थना सभाओं में पास्टर की भूमिका में नजर आता है। इन तस्वीरों में वह धार्मिक उपदेश देते हुए दिखाई देता है। इसके अलावा डेविड की कुछ तस्वीरें तालाबों और खुले जलस्रोतों में बपतिस्मा (बेप्टिज्म) कराते हुए भी सामने आई हैं, जो उसके सक्रिय धार्मिक प्रचार में शामिल होने की पुष्टि करती हैं। डेविड चाको सिर्फ प्रचारक नहीं, पूरे नेटवर्क का ऑपरेटर पुलिस अधिकारियों के मुताबिक डेविड चाको कोई नया चेहरा नहीं है। धमतरी और दुर्ग जिलों में भी पहले प्रार्थना सभाओं को लेकर उसके साथ विवाद हो चुके हैं। इन मामलों में स्थानीय स्तर पर आपत्ति और विरोध की स्थिति बनी थी, हालांकि तब कोई बड़ा मामला दर्ज नहीं हो पाया था। अब मौजूदा केस में सामने आए डिजिटल दस्तावेज, नेटवर्किंग मॉडल और फाइनेंशियल रिकॉर्ड के बाद पुलिस डेविड चाको की भूमिका को केवल स्थानीय प्रचारक नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क के ऑपरेटर के तौर पर देख रही है। पुलिस का कहना है कि डेविड चाको की विदेश यात्राएं, उसकी डिजिटल गतिविधियां और अलग-अलग जिलों में सक्रियता इस बात की ओर इशारा करती हैं कि वह लंबे समय से एक संगठित और योजनाबद्ध तरीके से नेटवर्क को खड़ा कर रहा था, जिसकी कड़ियां अब जांच में सामने आ रही हैं। प्रदेशभर के नेटवर्क की प्लानिंग राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के मुताबिक, नेटवर्क ने सिर्फ मौजूदा गतिविधियों तक खुद को सीमित नहीं रखा था, बल्कि भविष्य के लिए भी बड़े टारगेट तय कर रखे थे। इन टारगेट्स को हासिल करने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग दी जा रही थी, जिससे यह साफ होता है कि नेटवर्क लंबे समय की योजना के तहत काम कर रहा था। पुलिस का कहना है कि धर्मापुर गांव में चर्च की इमारत जरूर बन चुकी थी, लेकिन यहां खुले तौर पर कन्वर्जन की गतिविधियां शुरू नहीं हुई थीं। यह जगह मुख्य रूप से पूरे प्रदेश में चल रहे नेटवर्क की मॉनिटरिंग और प्लानिंग का केंद्र थी। बरामद डिजिटल दस्तावेज, प्रेजेंटेशन और फाइनेंशियल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है। इससे जुड़ी ये तस्वीरें देखिए…

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