आदमी के छूने से डर रही रेप की शिकार बच्ची:65 साल के अब्दुल ने जिस बच्ची से रेप किया,वो शांत हो गई,हंसना-खेलना बंद किया

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9 साल की बच्ची से 65 साल के बुजुर्ग ने पांच दिन तक दरिंदगी की। मां ने बचपन में ही साथ छोड़ दिया, पिता ने ज़िम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। और अब बच्ची का सहारा बस उसकी दादी है। जो दूसरों के घरों में काम करके उसे पाल रही हैं। आरोपी अब्दुल सज्जाद अंसारी भले ही जेल में है, उसकी दुकान पर बुल्डोजर चलाया गया है, लेकिन बच्ची अब भी गहरे सदमे में है। इतना कि हादसे के बाद से उसने बोलना, खेलना, खाना सब बंद कर दिया है। भास्कर की रिपोर्टर उस गली तक पहुंची, जहां ये वारदात हुई। गली में सन्नाटा पसरा है, इतना कि रोज़ जहां बच्चों का शोर होता था, आज वहां एक कंकड़ गिरने की आवाज़ भी साफ सुनी जा सकती है। ये डर का सन्नाटा था। वो खबर खोजने के लिए गई, लेकिन खबर के रूप में दर्द का एहसास लेकर लौटी। तो जो आप पढ़ेंगे वो खबर कितना है ये आप तय कीजिए, लेकिन उस बच्ची के ज़ेहन में क्या चल रहा है, इसे ज़रूर महसूस कीजिए। गली रायपुर की ही है। कानूनी बंधन है, लिहाज़ा न उस बच्ची का नाम लिख सकते हैं और न ही उस जगह की पहचान बता सकते हैं, जहां ये वारदात हुई। लेकिन इस गली का सन्नाटा बता रहा है, यहां कितनी चीखें निकली होंगी उस 9 साल की बच्ची की। वो बच्ची अब्दुल दादा के नाम से जानती थी उसे। पहचानती थी। इसलिए चॉकलेट जैसी छोटी छोटी चीजें भी उसे अब्दुल दादा की तरफ खींच लेती थी। अब्दुल 65 साल का है। झुर्रियों से लिपटे हुए इस उम्र में आमतौर पर एक प्रेम और सुकून का भाव होता है बच्चों के लिए, लेकिन इसके अंदर के हैवान ने उस मासूम भाव को कुचल दिया था। बात इसी महीने चंद रोज़ पहले की है। बच्ची ख़ुद वो तारीख़ नहीं जानती, जब अब्दुल ने उसके साथ रेप किया। रेप शब्द का मतलब वो नहीं जानती। वो सिर्फ प्यार और दुलार जानती थी, जो आते-जाते अक्सर बड़े-बूढ़े दिया करते हैं। ये बात किसी को मालूम नहीं थी कि अब्दुल ने उसके साथ रेप किया है। दरअसल, अचानक बच्ची ने स्कूल जाना बंद कर दिया। चार-पांच दिन बीत गए। वो कहती कि पेट दर्द हो रहा, नहीं जाऊंगी। आखिर उसकी दादी कब तक सहती। इस बच्ची को उसकी दादी ही पाल रही है। दूसरों के घरों में काम करके। वो दादी जो मां-बाप दोनों का फर्ज़ निभा रही थी, वो कैसे बर्दाश्त करती कि उसकी 9 साल की पोती पढ़ने-लिखने में पीछे रह जाए। इतनी मेहनत करके कॉपी-किताब, फीस देना…उसके बस के बाहर की चीजें हैं, लेकिन कर रही है। ऐसे में जब बच्ची चार-पांच दिनों तक स्कूल न जाए, तो कैसे नहीं चिढ़ेगी। दादी ने अपनी पोती को डांटना शुरू कर दिया। दो तमाचे भी जड़ दिए। स्कूल क्यों नहीं जा रही हो…रोज़ पेट दर्द का बहाना बना रही हो…क्या इसी के लिए इतनी मेहनत कर रही हूं… वो बच्ची अपनी दादी को कुछ भी कह नहीं पा रही थी। रो रही थी। आखिरकार रिश्ते की एक चाची को उसने पांच दिन पहले हुई घटना बताई। बच्ची ने चाची को बताया कि अब्दुल ने कैसे रेप किया। बच्ची ने बताया कि वो अब्दुल के किराना दुकान के सामने से जा रही थी। अब्दुल ने बच्ची को चॉकलेट देने के लिए बुलाया। चॉकलेट उसे बहुत पसंद था। चॉकलेट दुकान के अंदर रखी थी, उसे उठाने के लिए कहा। जब वो अंदर गई, दुकान बंद कर दी। इसके बाद जो कुछ भी हुआ, वो न तो यहां लिखा जा सकता है और न ही उसे बयां किया जा सकता है। उस दिन के बाद से वो दर्द से कराह रही थी।
उसकी चाची ने जब यह बात सुनी, तो उसके रोंगटे खड़े हो गए। चाची बच्ची की दादी के पास पहुंची और उसे सारी बात बताई। दादी रोने लगी। वो क्या सोच रही थी और बच्ची के साथ क्या हो गया..उसने बच्ची को स्कूल न जाने के लिए बहाना बनाने के कारण थप्पड़ भी जड़ दिए थे। आक्रोश और पीड़ा के आंसू लिए दादी ने बच्ची को गले से लगा लिया और रोने लगी। लेकिन अब क्या…यही सोच रही थी। वो बूढ़ा अब्दुल तो अब भी मौज से अपनी दुकान चला रहा था। उसका चेहरा देखते ही आंखों में खून उतर रहा था, लेकिन बूढ़ी दादी किससे मदद मांगती। आखिरकार हिम्मत करके वो मोहल्ले के पार्षद के पास पहुंची। पार्षद को उसने सारी बात बताई। उसने फौरन रिपोर्ट लिखवाई और वो बूढ़ा अब्दुल गिरफ्तार हुआ। दो चार दिन बाद नगर निगम के लोग उसकी दुकान तक पहुंचे और दुकान गिरा दी। ये दुकान तो गिर गई लेकिन दादी का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। वो कहती है- क्या होगा उसकी एक दुकान गिराने से…मेरी बच्ची को तो बर्बाद कर दिया न… उस दिन के पहले की वो बच्ची और अब में ज़मीन आसमान का फर्क आ गया है। उसकी दादी कहती हैं- पहले वो खिलखिलाती थी, मुस्काती थी, चिड़िया की तरह ही यहां से वहां फुदकती थी। उस दिन के बाद जैसे उसके पंख काट दिए गए हैं…उसने हंसना, खेलना, बोलना सब बंद कर दिया है। अब उसे कहते हैं कि स्कूल जाओ…तो डर जाती है। सहम जाती है। उसे कोई भी आदमी छूता है तो लगता है कि जैसे अब्दुल जैसा ही कोई है। उसे इंसान के स्पर्श से चिढ़ सी हो गई है। दादी कहती है कि उसका ये सदमा धीरे धीरे जाएगा, लेकिन एक बात दिमाग़ में रह-रहकर गूंज रही है। एक सवाल पीछा नहीं छोड़ रहा कि क्या बच्ची के साथ ये पहली बार हुआ है? कहीं ऐसा तो नहीं कि ऐसा पहले भी हो चुका हो…। बस इसी बात को याद करते हुए फिर चीख पड़ती है और कहती है कि दुकान तोड़ने से क्या होगा..उसने मेरी बच्ची की ज़िंदगी बर्बाद की है, उसका पूरा घर तोड़ना चाहिए। उस बच्ची के दर्द की इंतेहा है कि दादी ने काम छोड़ दिया है। 24 घंटे उसके पास रहना पड़ रहा है। सिहर के उठ जाती है वो बिस्तर पर, फिर रोने लगती है। उसे समझाने के लिए सारे शब्द दादी के पास खत्म हो चुके हैं। वो प्यार के स्पर्श को भूल चुकी है। सियासत अपना काम कर रही है…विरोध, नारेबाजी और प्रदर्शन घटना के बाद आरोपी अब्दुल के घर बुल्डोजर चल गया है। एक बात ये कही जा रही है कि आरोपी अब्दुल न होकर कोई ऐसा होता जो एक समुदाय विशेष का नहीं होता तो क्या ऐसी कार्रवाई होती…क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। बहरहाल, आरोपी की दुकान तोड़ी जा चुकी है। उधर, भारतीय जनता पार्टी के लोग इसे जेहादी मानसिकता करार दे रहे हैं। पार्षद ने कहा कि जेहादी मानसिकता वालों को कड़ा संदेश दिया गया है। ये कार्रवाई धर्म देखकर नहीं की गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भी बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कहा-“क्या किसी अपराधी के घर पर बुलडोजर चलाने से अपराध रुक जाएंगे? प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा चुकी है और सिर्फ तोड़फोड़ से इंसाफ़ नहीं मिलेगा। ………………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… रायपुर में 9-साल की बच्ची से 5 दिन तक रेप: बोली- चूड़ीवाला घर ले जाता था, प्राइवेट पार्ट में दर्द होने पर चाची को बताया रायपुर में 9 साल की बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। जहां 55 साल के अधेड़ व्यक्ति ने लगातार 5 दिनों तक दुष्कर्म किया है। आरोपी अब्दुल सज्जाद अंसारी बच्ची को चॉकलेट देकर अपने साथ ले जाता और उससे दुष्कर्म करता था। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। पढ़ें पूरी खबर…

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