दोपहर के 4 बज रहे हैं। हम बलौदाबाजार, भाटापारा के बकुलाही गांव में हैं। रियल स्पंज आयरन प्लांट के 10 फीट चौड़े और करीब 7 फीट ऊंचे लोहे के गेट के बाहर खड़े हैं। अंदर सफारी पहने कुछ गार्ड्स खड़े हुए हैं। बातचीत से पता चलता है कि सभी यूपी-बिहार के हैं। 6 घंटे पहले इस प्लांट के भीतर बाप-बेटे समेत 6 मजदूर लावा जैसी गर्म राख में जिंदा जल गए। 800°C से 900°C तापमान था। शरीर से चमड़ियां निकल गईं। हड्डियां दिख रहीं थीं। बिहार के मजदूरों को ठेकेदार झूठ बोलकर लाया था। मजदूरों के लिए सेफ्टी तक की व्यवस्था नहीं की थी। भास्कर रिपोर्टर जब प्लांट के भीतर दाखिल हुआ तो काम फिर शुरू हो चुका था। सेफ्टी स्लोगन वाले बोर्ड्स लगे हुए थे, लेकिन मजदूरों के लिए कोई सेफ्टी नहीं थी। पता चला कि मजदूरों की मौत डस्ट सेटलिंग चेंबर से वेट स्क्रबर में गिरने वाली डिपॉजिट डस्ट (गर्म राख) से हुई है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि किल्न चालू रखकर मजूदरों को हैमरिंग के लिए भेजा गया था। इसके अलावा प्लांट एडमिनिस्ट्रेशन ने बाहर से आए मजदूरों की जानकारी लोकल थाने में नहीं दी थी। 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस ने नोटिस भेजने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की है। भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए ब्लास्ट और मजदूरों के जिंदा जलने की पूरी कहानी…. पहले ये तस्वीरें देखिए… हादसे के 6 घंटे बाद भी प्लांट में सब ‘नॉर्मल’ था, फैक्ट्री बंद नहीं हुई भास्कर रिपोर्टर से सुरक्षा गार्ड्स ने एंट्री को लेकर विवाद किया। काफी बहस के बाद टीम किसी तरह अंदर दाखिल हो सकी। भीतर मशीनें चल रही थीं। मजदूर अपने-अपने काम में लगे थे। मानो सुबह यहां कुछ हुआ ही नहीं हो। जहां कुछ ही घंटे पहले 6 लोगों की जिंदगियां खत्म हुई थीं। वहां उत्पादन सामान्य तरीके से जारी था। भास्कर रिपोर्टर पैदल चलते हुए जब मुख्य घटनास्थल- किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर (DSC)-तक पहुंचा, तब जाकर हादसे की गंभीरता साफ नजर आई। मौके पर जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें जांच में जुटी थीं। प्लांट प्रबंधन के अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन कैमरों से दूरी बनाए हुए। यहां साफ दिख रहा था कि हादसा कोई मामूली तकनीकी चूक नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का नतीजा था। जांच टीम के एक सदस्य ने बताया 22 जनवरी को सुबह करीब 9.40 बजे रियल इस्पात प्लांट में स्पंज आयरन उत्पादन के दौरान डस्ट सेटलिंग चेंबर और वेट स्क्रबर के बीच काम चल रहा था। ये तस्वीरें भी देखिए… 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म राख में जिंदा जले मजदूर भास्कर की पड़ताल में पता चला कि ब्लास्ट के वक्त डस्ट सेटलिंग चेंबर के भीतर लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म राख को पोकिंग के माध्यम से नीचे गिराया जा रहा था। इसी दौरान 11 मजदूर गर्म राख की चपेट में आ गए। इनमें 6 मजदूर जिंदा जल गए। किल्न शटडाउन किए बिना ही मजदूरों को भेजा आयरन ओर को स्पंज आयरन बनाने की प्रक्रिया में कोल किल्न से निकलने वाली गर्म गैस और गर्म राख को DSC के जरिए आगे की पाइपलाइन में भेजा जाता है। DSC में माल जाम होने के कारण हैमरिंग (पोकिंग) की जा रही थी। यह बेहद जोखिम भरा काम था, लेकिन किल्न को शटडाउन किए बिना ही मजदूरों को अंदर भेज दिया गया। इसी दौरान अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। DSC के भीतर गर्म ऐश मजदूरों के ऊपर गिर पड़ी। मजदूर पास में ही थे। उन्हें भागने तक का मौका नहीं मिला। बाहर के मजदूर, लेकिन थाने में कोई सूचना नहीं दैनिक भास्कर की टीम ने जब प्लांट में काम कर रहे मजदूरों से बात करने की कोशिश की, तो सभी ने बातचीत से साफ इनकार कर दिया। ज्यादातर मजदूर दूसरे राज्यों के थे। सभी ने दूरी बनाए रखी। मानो किसी दबाव में हों। कानून के मुताबिक, अन्य राज्यों से आने वाले मजदूरों की जानकारी संबंधित थाने में देना अनिवार्य होता है, लेकिन रियल इस्पात प्रबंधन ने आज तक ऐसी कोई जानकारी थाने में नहीं दी। पुलिस ने भी फैक्ट्री में जाकर कभी जानकारी हासिल नहीं की। मेरे पति और ससुर को झूठ बोलकर ले गया था ठेकेदार- मृतक की पत्नी मृतक राजदेव भारती की पत्नी ने बताया कि मेरे पति राजदेव भारती, ससुर सुंदर भारती चार दिन पहले रविवार को ही कमाने गए थे। ठेकेदार मेरे पति, ससुर और गांव के अन्य लोगों को झूठ बोलकर, अच्छा काम दिलाने का बहाना बनाकर छत्तीसगढ़ ले गया था। कहा था काम अच्छा है, पैसे अच्छे मिलेंगे,लेकिन स्टील प्लांट में खतरनाक काम में उन्हें लगा दिया। परिजनों को पूरा मुआवजा दिया जाएगा- प्रबंधन वहीं प्लांट के मालिक नितेश अग्रवाल ने बताया कि रोज की तरह हाउस कीपिंग का काम चल रहा था, तभी डीएससी में डस्ट मटेरियल गिरा, जो काफी गर्म रहता है। मटेरियल नीचे काम कर रहे लोगों के ऊपर गिरने से ये हादसा हो गया। मृतकों और प्रभावितों के परिजनों को पूरा मुआवजा दिया जाएगा। स्पंज आयरन प्लांट के बारे में जानिए स्पंज आयरन प्लांट में लौह अयस्क (Iron Ore) से स्पंज आयरन तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया डायरेक्ट रिडक्शन तकनीक से होती है, जिसमें कोयला या गैस की मदद से अयस्क से ऑक्सीजन हटाई जाती है। इससे बना स्पंज आयरन आगे चलकर स्टील बनाने का कच्चा माल होता है, जिसे स्टील प्लांट में भेजा जाता है। हादसे से जुड़ी ये तस्वीरें भी देखिए…
