BBC दिल्ली के हेड रहे मार्क टली का निधन:90 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, 2005 में पद्म भूषण दिया गया था

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सीनियर पत्रकार और लेखक मार्क टली का रविवार को दिल्ली के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में निधन हो गया। वह 90 साल के थे। उनके करीबी मित्र सतीश जैकब ने न्यूज एजेंसी PTI को यह जानकारी दी। मार्क टली पिछले कुछ समय से बीमार थे और पिछले एक हफ्ते से साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। सतीश जैकब ने बताया कि मार्क का रविवार दोपहर मैक्स अस्पताल, साकेत में निधन हो गया। मार्क टली का जन्म कोलकाता में हुआ था। वह 22 साल तक BCC के नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख रहे। वह एक फेमस लेखक भी थे और ‘BBC रेडियो 4’ के प्रोग्राम ‘समथिंग अंडरस्टूड’ के प्रजेंटेटर रहे। उन्हें 2002 में नाइट की उपाधि दी गई थी और 2005 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। मार्क टली ने भारत पर कई किताबें लिखीं, जिनमें ‘नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया’, ‘इंडिया इन स्लो मोशन’ और ‘द हार्ट ऑफ इंडिया’ शामिल हैं। टली भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे फेमस अंग्रेजी पत्रकार थे मार्क टली भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे फेमस अग्रेजी पत्रकार माने जाते थे। उन्हें इंग्लैंड की महारानी और भारत के राष्ट्रपति दोनों से सम्मान मिला है। उन्होंने फिल्मों में आवाज दी है और भारत पर तीन लोकप्रिय किताबें लिखी हैं। ब्रिटेन के अखबारों ने उनकी तुलना रुडयार्ड किपलिंग से की और उन्हें भारत का सबसे पसंदीदा अंग्रेज कहा था। बीबीसी वर्ल्ड सर्विस पर उनकी रिपोर्टें पहले अंग्रेजी में आती हैं और बाद में हिंदी, उर्दू, तमिल, नेपाली और बंगाली में भी सुनाई जाती थी। मार्क टली कहते थे कि उन्हें पत्रकारिता से ज्यादा भारत में दिलचस्पी है और वह रिटायर होने के बाद भी यहीं रहना चाहते थे। वह साधारण जीवन जीते थे और रेलवे से उन्हें बहुत लगाव था। उनके दोस्त कहते थे कि वे हर खबर को लेकर बहुत चिंतित रहते थे क्योंकि एक गलत खबर दंगे भड़का सकती थी। टली पादरी बनना चाहते थे लेकिन सफल नहीं हुए मार्क टली का जन्म कोलकाता में हुआ था और उनका बचपन भारत में ही बीता। उनके पिता अंग्रेज व्यापारी थे और उनकी मां का परिवार लंबे समय तक बंगाल क्षेत्र में रहा। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वह दार्जिलिंग में फंसे रहे, जिसे वह अपनी किस्मत मानते हैं। बाद में उन्होंने इंग्लैंड में पढ़ाई की, सेना में रहे और कैम्ब्रिज से इतिहास की पढ़ाई की। उन्होंने पादरी बनने की कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने बीबीसी में नौकरी की और 1965 में दिल्ली आए। 1972 में वह बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख बने। मार्क टली ने बांग्लादेश युद्ध, इंदिरा गांधी के समय आपातकाल, पाकिस्तान की राजनीतिक उथल-पुथल, अफगानिस्तान पर सोवियत कब्जा, भोपाल गैस हादसा, स्वर्ण मंदिर पर सेना की कार्रवाई और इंदिरा गांधी की हत्या जैसी बड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग की। 1989 में उन पर राजीव गांधी की सरकार गिराने का आरोप लगा था। बाद में उन्होंने राजीव गांधी की हत्या की खबर भी सबसे पहले दुनिया तक पहुंचाई। कोलकाता से टली का पारिवारिक जुड़ाव 1857 से था मार्क टुली का कोलकाता से रिश्ता बहुत पुराना है। एक बार उन्होंने मीडिया को बताया था कि कोलकाता से उनका पारिवारिक जुड़ाव कम से कम 1857 तक जाता है। उस साल उनके ननिहाल के परदादा उत्तर प्रदेश में हुए विद्रोह से बचकर गंगा नदी के रास्ते नाव से कोलकाता पहुंचे थे। उनके नाना कोलकाता में जूट का कारोबार करते थे। वे जूट उस इलाके से खरीदते थे, जो आज बांग्लादेश है। इसी वजह से मार्क टुली की मां का जन्म वहां हुआ। बाद में उनकी मां की मुलाकात उनके पिता से कोलकाता में हुई और दोनों ने वहीं शादी की। उनके पिता अपने परिवार में पहले व्यक्ति थे जो भारत आए और बाद में कोलकाता की एक कंपनी गिलैंडर्स आर्बुथनॉट में सीनियर साझेदार बने। मार्क टुली को याद है कि कोलकाता में जन्म लेने से उन्हें बचपन में ब्रिटेन के बोर्डिंग स्कूल में खास पहचान मिलती थी। वे बताते हैं कि दस साल की उम्र में, जब वे ब्रिटिश बोर्डिंग स्कूल पहुंचे, तो कोलकाता में जन्म लेना उन्हें दूसरों से अलग बनाता था। वे गर्व से कहते थे कि उनका जन्म ब्रिटिश साम्राज्य के “दूसरे सबसे बड़े शहर” में हुआ है।

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