नगरीय निकायों के जरिए अलग-अलग इलाकों में विकास के कार्य जैसे नई और चौड़ी सड़के, ब्रिज आदी बनवाने जैसे काम करेंगी। यह बनने के बाद वहां आस-पास की प्रापर्टी के दाम बढ़ेंगे। इसके बाद फिर इस बात का आकलन किया जाएगा कि किस जगह पर विकास कार्य कराने से वहां जमीन के प्रापर्टी के रेट कितने बढ़े। इसी के आधार पर प्रॉपर्टी के मालिक को फिक्स टैक्स देना होगा।
