पैरा एथलीट बोलीं-चार फुटिया बौनी बोलकर लोगों ने चिढ़ाया:बचपन में मां-पिता का साया छूटा, भाई ने चाय ठेले में काम किया, 25 गोल्ड-सिल्वर जीतीं

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मेरी मां बचपन में ही दुनिया छोड़ गई। पिता ने जैसे-तैसे पाल-पोसकर बड़ा किया, लेकिन 2023 में उनका साया भी सिर से उठ गया। इसके बाद घर चलाने की जिम्मेदारी मेरे भाई के कंधों पर आ गई, जो किसी दूसरे के चाय ठेले में काम कर परिवार का खर्च चलाता है। टीन-टप्पर के किराए वाले घर में हम दो भाई और तीन बहनें रहते हैं, जिनमें से एक बहन की हाल ही में शादी हुई है। बचपन से ही लोगों ने मरे दिव्यांगता का खूब मजाक उड़ाया। कोई ‘बौनी’ कहता था, कोई चेहरे और शरीर की बनावट पर तंज कसता था। लोग मेरे पास खड़े होने से भी कतराते थे। इन तानों से बचने के लिए मैं अक्सर खुद को घर तक ही सीमित कर लेती थी, लेकिन हालातों और लोगों की बातों के आगे कभी हिम्मत नहीं हारी। आज कवर्धा की वही छोटी मेहरा पैरा एथलेटिक्स में 25 से ज्यादा गोल्ड और सिल्वर मेडल जीत चुकी है। पढ़िए-गरीबी, तानों और मजबूरियों से लड़कर खुद को साबित करने वाली एक पैरा एथलीट की कहानी:- पहले ये तस्वीरें देखिए… छोटी बताती हैं कि, उनकी सिस्टर के माध्यम से कवर्धा में वसीम सर से पहचान हुई। उन्हें पैरा स्पोर्ट्स के लिए एक शॉर्ट हाइट गर्ल की तलाश थी। मैं वहां जाने से डर रही थी कहीं फिर मेरा मजाक ना बन जाए। वहां मुझे वसीम सर ने बताया की एक पैरा स्पोर्ट्स होता है। जिसमें कोई भी दिव्यांग पार्टिसिपेट कर सकता है और देश के लिए खेल सकता है। उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया और मैं यहां तक का सफर तय कर पाई।
2021 में पैरा एथलीट के तौर पर शुरुआत छोटी मेहरा अभी इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय जोरा में छत्तीसगढ़ पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पार्टिसिपेट करने पहुंची थी। जहां उसने चक्र फेंक और गोला फेंक में गोल्ड मेडल जीते। छोटी ने अपने भारत सफर की शुरुआत 2021 में पैरा एथलीट के तौर पर की थी। उसने खेलो इंडिया चैंपियनशिप में भी भाग लिया था इसके अलावा 2023 में राष्ट्रीय पैरा एथलीट में 2 मेडल जीते थे। 2025 में दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलीट में भी वह कांस्य पदक विजेता रहीं। उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से 2024 में गुंडाधुर सम्मान दिया जा चुका है। सरकार की तरफ से नहीं मिलता कोई सहयोग छोटी मेहरा का कहना है कि वह आगे भी खेलना चाहती हैं। लेकिन उसे सरकार की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। प्रॉपर डाइट नहीं मिलने की वजह से खेल प्रभावित होता है। भाई कई बार डाइट की व्यवस्था कर देता है लेकिन गरीबी और आर्थिक स्थिति कमजोरी होने से समस्याएं बनी हुई है। इसी साल 2026 में एशियाई गेम होने वाला है। जिसमें मैं खुद को गोल्ड मेडल के लिए तैयार कर रही हूं। मुझे अच्छे कोच और डाइट की जरूरत है। स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत में किसी पेशेवर एथलीट के लिए हर महीने डाइट पर ₹10,000 से ₹25,000 या उससे अधिक खर्च हो सकता है। इसमें प्रोटीन, कार्ब्स, फल, सब्जियां, और सप्लीमेंट्स शामिल होते हैं। 50 से ज्यादा मैडल जीत चुके हैं देवराम राज्य स्तरीय पैरा एथलीट प्रतियोगिता में बालोद जिले के पेरपाल गांव से देवराम पटेल भी पहुंचे थे। वह स्टेट और नेशनल लेवल मैं करीब 50 से ज्यादा मैडल जीत चुके है। रायपुर के प्रतियोगिता में भी उन्होंने मेडल हासिल किए हैं। वो भाला फेंक और गोला फेंक के खिलाड़ी हैं। देवराम एक पैर से दिव्यांग है, बावजूद 35 से 40 मीटर तक भाला फेंक सकते हैं। अच्छे डाइट और प्रैक्टिस से वह इसे बढ़ाना चाहते हैं। अन्य खिलाड़ी बोलीं- डाइट के लिए हो रही है मुश्किलें दुर्ग जिले की रहने वाली संगीता मसीह ने कहा कि नेशनल लेवल पर उन्होंने 23 मेडल जीता है। घर की आर्थिक कंडीशन अच्छी नहीं है जिससे डाइट समय पर नहीं मिल पाता। वह 2011 से भारत खेल रही हैं उन्हें शहीद राजीव पांडे अवॉर्ड भी मिल चुका है। महासमुंद की रहने वाली ईश्वरी निषाद देख नहीं सकतीं। उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर दौड़ में कई पदक जीता है। वह दुबई में भी दौड़ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि दौड़ की प्रैक्टिस के लिए उन्हें कोच और ग्राउंड की आवश्यकता है।

छत्तीसगढ़ राज्य पैरा एथलीट का हुआ समापन रायपुर में 16वीं छत्तीसगढ़ राज्य पैरा एथलीट संगठन प्रतियोगिता का शुक्रवार को समापन हुआ। यह प्रतियोगिता तीन दिन तक चली, जिसमें पूरे छत्तीसगढ़ से करीब 350 दिव्यांग खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। खिलाड़ियों के साथ उनके परिजन, कोच और ऑफिशियल भी मौजूद रहें। इस दौरान दौड़, गोला फेंक, तवा फेंक, लंबी कूद और बैडमिंटन जैसे खेल आयोजित किए गए। ……………………….. स्पोर्ट्स से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… छत्तीसगढ़ ने 9वीं बार स्वर्ण पदक जीता, कवर्धा के 2 खिलाड़ी चमके छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय सॉफ्टबॉल में अपना दबदबा साबित किया है। पश्चिम बंगाल के दत्ता पुलिया में 14 से 18 दिसंबर तक आयोजित 47वीं सीनियर राष्ट्रीय सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ पुरुष टीम ने 9वीं बार स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। पढ़ें पूरी खबर छत्तीसगढ़ से वे ऐसी एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं:नेहा बड़वाईक ने सेंट्रल जोन टीम में जगह बनाई
बीसीसीआई सीनियर महिला इंटर जोन टी-20 ट्रॉफी 4 नवंबर से नागालैंड में आयोजित की जा रही है। इस टूर्नामेंट में देश के विभिन्न ज़ोन नॉर्थ, साउथ, सेंट्रल, नॉर्थ ईस्ट, वेस्ट और ईस्ट जोन की महिला टीमें हिस्सा ले रही हैं। पढ़ें पूरी खबर

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