16 दिसंबर 2013 से 31 मार्च 2016 तक की अवधि में कंपनी द्वारा कैश क्रेडिट के खाते से बड़ी मात्रा में कैश निकाला गया।जबकि ऋण की शर्तों के अनुसार उक्त राशि का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में ही होना था। निर्यात के लिए स्वीकृत 2.95 करोड़ रुपये का भी दुरुपयोग हुआ। इस राशि के कोई निर्यात नहीं किया गया।
