मध्य हाई कोर्ट ने साफ किया है कि ट्रांसफर, वेतनमान, इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सीनियरिटी, नियमितीकरण, निलंबन और सेवा समाप्ति जैसे मामलों में कर्मचारी मजबूरी में हाई कोर्ट का रुख कर रहे हैं, जिससे न्यायालयों पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है। यदि विभागीय स्तर पर ही कर्मचारियों के विवाद सुलझें तो समय, धन और संसाधनों की बचत होगी और इससे कर्मचारियों व सरकार, दोनों को राहत मिलेगी।
