मॉस्को में रूस की सीक्रेट मिलिट्री एजेंसी के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल व्लादिमीर अलेक्सेयेव पर गोलीबारी की गई है। रूस की जांच एजेंसी इन्वेस्टिगेटिव कमेटी ने बताया कि यह हमला राजधानी के उत्तर-पश्चिमी इलाके में एक रिहायशी इमारत के अंदर हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक, एक अज्ञात हमलावर ने अलेक्सेयेव पर कई गोलियां चलाईं और इसके बाद मौके से फरार हो गया। बयान में यह नहीं बताया गया है कि अलेक्सेयेव की हालत कैसी है और न ही यह साफ किया गया है कि इस हमले के पीछे कौन हो सकता है। इस मामले में जांच एजेंसियों ने आपराधिक केस दर्ज कर लिया है। अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद लोगों से पूछताछ कर रहे हैं और आसपास लगे सुरक्षा कैमरों की फुटेज भी देखी जा रही है। यह गोलीबारी ऐसे समय में हुई है, जब एक दिन पहले ही अबू धाबी में अमेरिका, यूक्रेन और रूस के बीच शांति वार्ता हुई थी। इस वार्ता में रूस की तरफ से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मिलिट्री इंटेलिजेंस के प्रमुख एडमिरल इगोर कोस्त्युकोव कर रहे थे। इस बातचीत के बाद अमेरिका और रूस ने कहा था कि दोनों देश फिर से हाई लेवल की सैन्य बातचीत शुरू करने पर सहमत हो गए हैं, जिसे 2021 में रोक दिया गया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… पाकिस्तान में गटर के ढक्कन चोरी हो रहे, CM मरियम नवाज ने कानून बनाया, 10 साल जेल की सजा का एलान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में गटर के ढक्कनों की चोरी बढ़ती जा रही है। इसे रोकने के लिए CM मरियम नवाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कानून बनाने का एलान किया है। मरियम ने वीडियो में बताया कि इस कानून के तहत ढक्कन चुराने, बेचने या खरीदने वालों को 1 से 10 साल तक की जेल हो सकती है। अगर खुले गटर में गिरने से किसी की मौत हो जाती है, तो 10 साल की सजा और 30 से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगेगा। यह कानून चोरों, कबाड़ियों और खरीदारों सभी पर लागू होगा। मरियम ने कहा कि सुबह लगाए गए ढक्कन रात तक गायब हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि चोर गधा गाड़ी पर आते हैं और ढक्कन चुरा ले जाते हैं। इससे लोगों की जान जा रही है। उन्होंने बताया कि लाहौर के भाटी गेट के पास गटर में गिरने से एक महिला और उसके 10 महीने बच्चे की मौत हो गई थी। मरियम ने लोगों से अपील की है कि वे ढक्कन की चोरी न करें। ढक्कनों की चोरी का मुख्य कारण देश में चल रहा गंभीर आर्थिक संकट है। ये ढक्कन आमतौर पर लोहा या स्टील से बने होते हैं। लोग इन्हें चोरी करके मेटल के रूप में बेचकर पैसे कमाने की कोशिश कर रहे हैं। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के घर के बाहर हिंसक प्रदर्शन, सरकारी कर्मचारी और पुलिस आपस में भिड़े बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शुक्रवार को सरकारी कर्मचारियों और पुलिस के बीच जोरदार झड़प हो गई। ये कर्मचारी नौवें नेशनल पे स्केल को लागू करने की मांग कर रहे थे। ये झड़प मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के सरकारी आवास ‘जमुना’ के बाहर हुआ। यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब आम चुनाव में सिर्फ छह दिन बचे हैं। अगस्त 2024 में हुई हिंसा के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था और वे भारत चली गई थीं। इसके बाद निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक केयरटेकर सरकार बनाई गई थी। शुक्रवार सुबह देश के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रदर्शनकारी शहीद मीनार पर जमा हुए और वहां से जमुना की ओर मार्च करने लगे। वे नौवें नेशनल पे कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर गजट तुरंत जारी करने और वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान लोग नारे लगा रहे थे कि पेट में चावल नहीं है, तो मुंह में विकास किस बात का। करीब साढ़े ग्यारह बजे प्रदर्शनकारियों ने शाहबाग इलाके में लगाए गए पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और आगे बढ़ने लगे। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए वाटर कैनन, आंसू गैस, साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज भी किया। प्रदर्शनकारियों को जमुना पहुंचने से रोकने के लिए सेना के जवान भी तैनात किए गए। झड़प के दौरान कई लोगों के घायल होने की खबर है। हालात तब और तनावपूर्ण हो गए जब एक सीनियर पुलिस अधिकारी मसूद आलम ने एक प्रदर्शनकारी से पूछा कि क्या वे चुनाव को बिगाड़ने के इरादे से जमुना आए हैं। सरकारी कर्मचारियों ने कहा कि अगर पुलिस की कार्रवाई जारी रही तो इसके गंभीर राजनीतिक नतीजे हो सकते हैं। एक प्रदर्शनकारी ने चेतावनी दी कि अगर हमले नहीं रुके तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने TrumpRx नाम की सरकारी वेबसाइट लॉन्च की, लोग कम कीमत पर दवाइयां खरीद सकेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को TrumpRx नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च की। ट्रम्प का दावा है कि यह प्लेटफॉर्म अमेरिकियों को सस्ती दवाएं दिलाने में मदद करेगा और इससे हेल्थकेयर खर्च कम होगा। व्हाइट हाउस परिसर में वेबसाइट का अनावरण करते हुए ट्रम्प ने कहा, ‘आप बहुत सारा पैसा बचाने वाले हैं। यह पूरे हेल्थकेयर सिस्टम के लिए भी अच्छा है।’ TrumpRx सीधे दवाएं नहीं बेचती। यह वेबसाइट एक तरह से क्लीयरिंगहाउस की तरह काम करती है, जो यूजर्स को दवा कंपनियों की अपनी वेबसाइटों पर भेजती है, जहां वे दवाएं खरीद सकते हैं। इसके साथ ही रिटेल फार्मेसी में इस्तेमाल के लिए कूपन भी उपलब्ध कराए जाते हैं। लॉन्च के समय प्लेटफॉर्म पर 40 से ज्यादा दवाएं शामिल हैं। इनमें वजन घटाने की चर्चित दवाएं ओजेम्पिक और वेगोवी भी शामिल हैं, जिनकी कीमतों को लेकर अमेरिका में लंबे समय से बहस होती रही है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में महंगाई और जीवनयापन की लागत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी के लिए दवाओं, हेल्थकेयर, घर, किराया और ग्रॉसरी की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं। ट्रम्प ने कहा कि दवाओं पर मिलने वाली छूट फार्मास्युटिकल कंपनियों पर उनके व्यक्तिगत दबाव का नतीजा है। उनका कहना है कि अमेरिकी लंबे समय से दवाओं के लिए जरूरत से ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि दूसरे देशों में वही दवाएं सस्ती मिलती हैं। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका में दवाओं की कीमतें कम होने से कंपनियां दूसरे देशों में कीमतें बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा, “हम दुनिया को सब्सिडी देकर थक चुके हैं।” राष्ट्रपति ने पहली बार सितंबर में TrumpRx का जिक्र किया था। तब उन्होंने बताया था कि दवा कंपनियों के साथ 15 से ज्यादा समझौते किए गए हैं, जिनका मकसद अमेरिका में दवाओं की कीमतें विकसित देशों में सबसे कम दरों के बराबर लाना है। TrumpRx का लॉन्च कई बार टल चुका था। पिछले साल सेंटर फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज के प्रमुख मेहमत ओज ने कहा था कि वेबसाइट साल के अंत तक शुरू हो जाएगी, लेकिन बाद में जनवरी का प्रस्तावित लॉन्च भी टाल दिया गया। न्यूयॉर्क मेयर ममदानी ने हिजाब को मुस्लिम महिलाओं की पहचान बताया, आलोचक बोले- ईरान के हालात को नजरअंदाज कर रहे न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद में घिर गए हैं। 1 फरवरी को वर्ल्ड हिजाब डे के मौके पर उनके ऑफिस की ओर से किए गए एक पोस्ट को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि यह पोस्ट ईरान में महिलाओं पर लागू जबरन हिजाब कानूनों और वहां हो रहे दमन को नजरअंदाज करता है। मेयर के ऑफिस ऑफ इमिग्रेंट अफेयर्स की ओर से साझा किए गए पोस्ट में कहा गया था कि दुनिया भर की उन मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों की आस्था, पहचान और गर्व का जश्न मनाया जा रहा है, जो हिजाब पहनना चुनती हैं। इस पोस्ट की टाइमिंग और भाषा को लेकर आलोचकों ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि ईरान में हिजाब पहनने से इनकार करने पर महिलाओं को गिरफ्तार किया जा रहा है, पीटा जा रहा है और कई मामलों में उनकी जान तक चली गई है। ऐसे माहौल में हिजाब को गर्व और उत्सव के प्रतीक के रूप में पेश करना संवेदनहीन है। ईरानी-अमेरिकी पत्रकार और एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद ने मेयर को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि न्यूयॉर्क जैसे शहर में रहते हुए भी उन्हें यह पोस्ट देखकर मानसिक पीड़ा हो रही है। उन्होंने लिखा कि ईरान में महिलाएं हिजाब और उससे जुड़ी इस्लामिक विचारधारा को न मानने पर जेल भेजी जा रही हैं, गोली मारी जा रही हैं, जबकि न्यूयॉर्क में उसी प्रतीक का जश्न मनाया जा रहा है। तुर्किेए-अमेरिकी अर्थशास्त्री और राजनीतिक वैज्ञानिक तैमूर कुरान ने कहा कि ईरान, तुर्किए और सऊदी अरब जैसे देशों में लाखों मुसलमान इसे गर्व नहीं बल्कि उत्पीड़न का प्रतीक मानते हैं। तैमूर कुरान ने यह भी कहा कि किसी एक धार्मिक परिधान की आधिकारिक रूप से प्रशंसा करना धार्मिक पक्षपात जैसा लग सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शहर प्रशासन अन्य धर्मों के प्रतीकों के साथ भी ऐसा ही करेगा। उनके मुताबिक, पहचान की राजनीति पहले ही अमेरिका में गहरे विभाजन पैदा कर चुकी है और यह पोस्ट उन तनावों को और बढ़ाती है।
