केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज जगदलपुर जाएंगे:बस्तर पंडुम के समापन समारोह में शामिल होंगे, रायपुर में कहा– 90% क्षेत्र नक्सल मुक्त

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज (9 फरवरी) को एक दिवसीय बस्तर दौरे पर रहेंगे। वे जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय कार्यक्रम के समापन समारोह में शामिल होंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब बस्तर संभाग में सुरक्षा हालात और नक्सल विरोधी अभियानों को लेकर लगातार बड़ी कार्रवाई चल रही है। बस्तर को नक्सलमुक्त बनाने की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की गई है। पिछले करीब डेढ़ महीने के अंदर अमित शाह का ये दूसरी बार बस्तर दौरा है। ऐसा माना जा रहा है कि अमित शाह बस्तर पंडुम के इस मंच से नक्सल मामले को लेकर कुछ बड़ा ऐलान कर सकते हैं। उनके बस्तर दौरे को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वहीं रविवार को गृहमंत्री शाह ने नक्सलवाद पर रायपुर में हाईलेवल मीटिंग ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि अब माओवाद से 90 प्रतिशत क्षेत्र मुक्त हो चुका है और उन्होंने दोहराया कि 31 मार्च से पहले माओवादी समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा। हालांकि, उन्होंने माओवादियों से हथियार छोड़ने की अपील भी की और कहा कि सरकार एक भी गोली चलाना नहीं चाहती। जो माओवादी आत्मसमर्पण करेंगे, सरकार उनका रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेगी। बैठक की कुछ तस्वीरें देखिए… लाल बाग मैदान में चल रहा कार्यक्रम जगदलपुर के लाल बाग मैदान में अमित शाह आएंगे। यहां शाह के दौरे को लेकर तीन लेयर में सुरक्षा व्यवस्था की गई है। केंद्रीय सशस्त्र बल, राज्य पुलिस और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई है। बस्तर IG सुंदरराज पी की माने तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम स्थल, एयरपोर्ट, आवागमन मार्ग में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। एक ही मंच में बस्तर की संस्कृति और परंपरा बस्तर पंडुम के समापन समारोह में संभाग के कई जिलों से आए जनजातीय कलाकार अपनी लोकसंस्कृति, पारंपरिक नृत्य और वाद्य यंत्रों के माध्यम से बस्तर की पहचान को मंच पर प्रस्तुत करेंगे। स्कूली छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का खास आकर्षण रहेंगी। नक्सल एंगल के लिहाज से खास माना जा रहा है दौरा अमित शाह का यह दौरा नक्सली एंगल के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। हाल के महीनों में बस्तर में सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज हुई है, जिसमें कई नक्सली ठिकानों को ध्वस्त किया गया है और संगठन को लॉजिस्टिक स्तर पर नुकसान पहुंचा है। ऐसे माहौल में केंद्रीय गृहमंत्री का बस्तर आना यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार नक्सल गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए है और जमीनी हालात की प्रत्यक्ष समीक्षा को प्राथमिकता दे रही है। हालांकि, प्रशासनिक और सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि यह दौरा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से स्थानीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ना और विकास के प्रति भरोसा मजबूत करना भी इस दौरे का अहम पहलू है। यह संदेश देने की कोशिश है कि बस्तर की पहचान सिर्फ संघर्ष से नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और संभावनाओं से भी जुड़ी है। अमित शाह का बस्तर दौरा एक संतुलित रणनीति का प्रतीक माना जा रहा है, जहां एक ओर सुरक्षा और नक्सल उन्मूलन को लेकर सख्ती है, वहीं दूसरी ओर संवाद, संस्कृति और विकास के माध्यम से विश्वास कायम करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
रायपुर में रविवार को गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कम्यूनिस्ट शासन में रहे वहां विकास नहीं कर पाए। जब हमने आदिवासियों के कल्याण की बात की, वहां भी अंधकार फैला दिए। विचारधारा ही विनाश की घातक विचारधारा है। बहुत जरूरी है कि देश इस विचारधारा से निजात पा ले। बता दें कि अमित शाह 3 दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे हैं। रविवार को राजधानी रायपुर के मेफेयर होटल में उन्होंने नक्सलवाद पर हाईलेवल मीटिंग ली। बैठक के पहले सेशन में इंटेलिजेंस इनपुट्स और विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा हुई। शाह ने एक्स जानकारी शेयर करते हुए लिखा कि-आज रायपुर में छत्तीसगढ़ सरकार और अधिकारियों के साथ नक्सलविरोधी अभियानों पर समीक्षा बैठक की। सिक्योरिटी सेंट्रिक स्ट्रेटजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर प्रहार और आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक परिणाम आए हैं। इस 31 मार्च से पहले नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो रहा है। शाह ने आगे लिखा- जो छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ था, भाजपा की डबल इंजन सरकार में विकास का पर्याय बन चुका है। यहां के युवा स्पोर्ट्स, फॉरेंसिक और टेक्निकल एजुकेशन को गति देते हुए अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी सहेज रहे हैं। दूसरे सेशन में नक्सल प्रभावित इलाकों की स्थिति पर चर्चा हुई है। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, कई प्रदेशों के डीजीपी सहित एसीएस गृह, CRPF और कई अन्य सैन्य सुरक्षा के डीजीपी शामिल हुए। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कम्युनिस्ट विचारधारा “विनाशकारी” है। देश को इससे जल्द से जल्द मुक्ति पाना चाहिए। माओवादी समस्या न तो विकास की कमी से जुड़ी है और न ही यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा है। उन्होंने साफ कहा कि वामपंथी उग्रवाद एक विचारधारा-प्रेरित चुनौती है। गृह मंत्री ने कहा कि माओवादी समस्या का सही आकलन न किया जाना आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने उन तर्कों को खारिज किया जिनमें माओवाद को विकास या कानून-व्यवस्था से जोड़ा जाता है। शाह बोले- नक्सलवाद एक विचारधारात्मक समस्या उन्होंने कहा कि जब देश में माओवादी समस्या उभरी, तब इसके मुख्य प्रभावित क्षेत्र तेलंगाना, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के सीमावर्ती जिले, खासकर बस्तर थे। 1980 के दशक में जब यह समस्या शुरू हुई, उस समय के विकास संबंधी आंकड़े उपलब्ध हैं। उस दौर में देश में बस्तर से भी ज्यादा पिछड़े 100 से अधिक जिले थे। अमित शाह ने सवाल उठाया, “अगर माओवाद की जड़ विकास की कमी है, तो फिर उन 100 जिलों में यह समस्या क्यों नहीं फैली, जो बस्तर से भी ज्यादा पिछड़े थे?” उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था की समस्या बताते हैं, लेकिन वह इससे भी सहमत नहीं हैं। माओवादी समस्या के उभरने से पहले बस्तर की कानून-व्यवस्था की स्थिति बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से बेहतर थी। उन्होंने कहा, “यह न तो कानून-व्यवस्था से जुड़ा है और न ही विकास से। मैं किसी से भी बहस कर सकता हूं और तथ्यों और प्रमाणों के साथ साबित कर सकता हूं कि यह एक विचारधारात्मक समस्या है।” बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनेगा- शाह गृह मंत्री ने कहा कि माओवादियों ने गरीब आदिवासी युवाओं के हाथों में हथियार थमाए और तिरुपति से पशुपतिनाथ तक ‘रेड कॉरिडोर’ का नारा दिया। उन्होंने कहा, “साढ़े चार दशकों तक उन्होंने इस पूरे क्षेत्र में विकास को रोके रखा।” शाह ने आगे कहा मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि अगर बस्तर माओवादी समस्या से प्रभावित नहीं होता, तो आज यह देश का सबसे विकसित जिला होता। आने वाले 10 वर्षों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनेगा। माओवाद से 90 प्रतिशत क्षेत्र मुक्त गृहमंत्री ने कहा कि अब माओवाद से 90 प्रतिशत क्षेत्र मुक्त हो चुका है और उन्होंने दोहराया कि 31 मार्च से पहले माओवादी समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा। हालांकि, उन्होंने माओवादियों से हथियार छोड़ने की अपील भी की और कहा कि सरकार एक भी गोली चलाना नहीं चाहती। जो माओवादी आत्मसमर्पण करेंगे, सरकार उनका रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेगी। नक्सली खात्मे की डेडलाइन को 51 दिन बाकी छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को लेकर केंद्र सरकार की रणनीति से जुड़े अहम दौर की शुरुआत हो रही है। अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन अब नजदीक आ चुकी है। इस समयसीमा का ऐलान खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। इसके बाद छत्तीसगढ़ समेत नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल लगातार अभियान चला रहे हैं। इस डेडलाइन में अब करीब 51 दिन का ही समय बाकी है। …………………………. इससे संबंधित यह खबर भी पढ़िए… शाह बोले-नक्सलियों से चर्चा नहीं, हथियार डालना ही ऑप्शन:जगदलपुर में कहा- 31 मार्च तक देश से मिटा देंगे नक्सलवाद, मुरिया दरबार की रस्म निभाई जगदलपुर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च से पहले बस्तर नक्सलमुक्त हो जाएगा। दिल्ली के लोगों ने भ्रम फैलाया, नक्सलवाद ने बस्तर को विकास से दूर किया, लेकिन अब भाजपा शासन में मुफ्त स्वास्थ्य बीमा, 3100 रुपए प्रति क्विंटल पर धान खरीदी और एक माह में 500 से अधिक नक्सलियों का सरेंडर जैसे ठोस कदम उठाए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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