BJP में छत्तीसगढ़ का बढ़ा कद:पहले नड्डा, अब नबीन बने राष्ट्रीय अध्यक्ष, संगठन-सियासत में बदलाव दिखेंगे, स्थानीय मुद्दे दिल्ली तक पहुंचेंगे

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बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी का छत्तीसगढ़ कनेक्शन एक बार फिर साफ दिखाई दिया है। पहले जेपी नड्डा और अब छत्तीसगढ़ प्रभारी रहे नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना इस बात का संकेत है कि पार्टी की केंद्रीय राजनीति में राज्य की भूमिका लगातार बढ़ी है। नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ में संगठन और सियासत दोनों स्तर पर बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है। यह फैसला केवल दिल्ली की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ की सियासत और संगठनात्मक मजबूती पर भी दिख सकता है। BJP के इतिहास में यह दूसरा मौका है, जब छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभाल चुके नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। जेपी नड्डा ने भी पहले छत्तीसगढ़ प्रभारी के रूप में कमान संभाली थी। इसके बाद उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। जेपी नड्डा के कार्यकाल के दौरान भी पार्टी ने छत्तीसगढ़ को संगठनात्मक प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल किया था। अब नितिन नबीन के चयन को भी उसी कड़ी में देखा जा रहा है। पार्टी के अंदर यह चर्चा है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जहां बीजेपी को कांग्रेस से सीधी और लगातार लड़ाई लड़नी पड़ी है, वहां के अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर काम आ सकते हैं। पहले देखिए ये तस्वीरें- नितिन नबीन का छत्तीसगढ़ कनेक्शन नितिन नबीन ने छत्तीसगढ़ प्रभारी रहते हुए संगठन के कई अहम फैसलों में भूमिका निभाई। 2023 में उन्हें पहली बार छत्तीसगढ़ BJP का को-इंचार्ज बनाया गया था, जब ओम माथुर इंचार्ज थे। नितिन नबीन की हालिया कामयाबी छत्तीसगढ़ विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में BJP को जीत दिलाना रही है। विधानसभा चुनाव की तैयारियों से लेकर लोकसभा चुनाव तक, टिकट वितरण, जिलों में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना और स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय बनाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहा। नबीन ने छत्तीसगढ़ में काम करते हुए ग्राउंड पॉलिटिक्स को नजदीक से समझा। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां आदिवासी, ग्रामीण और शहरी वोट बैंक की अपनी अलग-अलग संवेदनशीलता हैं, वहां संगठन को एकजुट रखना आसान नहीं होता। नितिन नबीन ने प्रभारी रहते हुए इन्हीं जमीनी मुद्दों को समझने की कोशिश की और रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई। संगठन पर पकड़ और मैसेजिंग छत्तीसगढ़ में बीजेपी को पिछले कुछ सालों में संगठनात्मक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की सरकार, स्थानीय मुद्दों का दबाव और अंदरूनी गुटबाजी जैसी समस्याएं सामने आईं। इस दौरान नितिन नबीन का फोकस संगठन को नीचे तक एक्टिव रखने पर रहा। मंडल स्तर से लेकर जिला इकाइयों तक नियमित फीडबैक सिस्टम को मजबूत किया गया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नबीन की कार्यशैली अपेक्षाकृत शांत लेकिन सख्त मानी जाती है। छत्तीसगढ़ में उन्होंने साफ संदेश दिया था कि संगठन और सरकार अलग-अलग नहीं चल सकते। यही वजह है कि कई जिलों में संगठनात्मक फेरबदल किए गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को क्या फायदा? नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तर पर फायदा मिल सकता है। पहला बड़ा फायदा यह माना जा रहा है कि अब छत्तीसगढ़ के मुद्दे सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक ज्यादा मजबूती से पहुंचेंगे। चाहे वह नक्सल प्रभावित इलाकों का मामला हो, आदिवासी क्षेत्रों में विकास की चुनौती हो या शहरी राजनीति से जुड़े मुद्दे, इन सब पर दिल्ली में सुनवाई का स्तर बढ़ सकता है। दूसरा फायदा संगठनात्मक संतुलन से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ बीजेपी में लंबे समय से अंदरूनी गुटबाजी की चर्चा होती रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का राज्य से सीधा जुड़ाव होने की वजह से संगठन में संतुलन साधने की कोशिश तेज हो सकती है। टिकट वितरण और नेतृत्व चयन पर असर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय, पंचायत और भविष्य के विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियां होंगी। नितिन नबीन की भूमिका इन चुनावों में काफी अहम हो सकती है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि अब टिकट वितरण में परफॉर्मेंस और ग्राउंड रिपोर्ट को ज्यादा तवज्जो दी जा सकती है। इसके अलावा युवा नेताओं को आगे बढ़ाने और पुराने चेहरों के साथ संतुलन बनाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है। नबीन पहले भी छत्तीसगढ़ में संगठन को लेकर यह संदेश दे चुके हैं कि सिर्फ नाम नहीं, काम के आधार पर जिम्मेदारी तय होगी। केंद्र और राज्य के बीच समन्वय छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ा फायदा यह भी हो सकता है कि केंद्र और राज्य संगठन के बीच बेहतर समन्वय बने। केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में किस तरह पेश किया जाए, किन इलाकों में ज्यादा फोकस हो, इस पर रणनीति साफ हो सकती है। खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में विकास योजनाओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की लाइन और मजबूत हो सकती है। जेपी नड्डा मॉडल की झलक? जेपी नड्डा जब राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, तब उन्होंने छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के संगठनात्मक अनुभव का इस्तेमाल राष्ट्रीय स्तर पर किया था। अब नितिन नबीन के मामले में भी ऐसा ही माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ में संगठन चलाने के दौरान जो चुनौतियां सामने आईं, वे कई अन्य राज्यों से मिलती-जुलती हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ मॉडल पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बन सकता है। कांग्रेस के लिए भी बदला हुआ मुकाबला नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए भी मुकाबला और सख्त हो सकता है। बीजेपी अब राज्य में ज्यादा आक्रामक और संगठित रणनीति के साथ उतर सकती है। कांग्रेस के स्थानीय मुद्दों, सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर बीजेपी का फोकस बढ़ सकता है। संगठन के भीतर संदेश साफ नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना छत्तीसगढ़ बीजेपी के कार्यकर्ताओं के लिए भी एक संदेश है कि राज्य में काम करने वाले नेताओं और प्रभारी की रिपोर्टिंग को पार्टी गंभीरता से लेती है। इससे कार्यकर्ताओं में यह भरोसा बन सकता है कि उनकी मेहनत और फीडबैक सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचती है। कुल मिलाकर नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए भी यह एक नया अध्याय हो सकता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि पार्टी छत्तीसगढ़ को किस तरह की प्राथमिकता देती है और राज्य संगठन में क्या बड़े फैसले लिए जाते हैं। फिलहाल इतना तय है कि जिस तरह जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ पार्टी की रणनीति में अहम रहा, उसी तरह अब नितिन नबीन के दौर में भी छत्तीसगढ़ बीजेपी की सियासत के केंद्र में बना रह सकता है।

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