पूरी कॉलोनी में सन्नाटा पसरा हुआ था। करीब पांच बजे जैसे ही शव घर पहुंचा, रुदन की आवाज सुनाई देने लगी। हर कोई राजा के शव को देखना चाहता था। लेकिन शव ऐसी स्थिति में नहीं था कि दर्शन के लिए ताबूत से निकाला जाए। अंतिम दर्शन के लिए ताबूत पर राजा का फोटो लगाया गया। 15 मिनट के अंदर शव रीजनल पार्क मुक्तिधाम रवाना करवा दिया गया।
