बहुचर्चित ओबीसी आरक्षण मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन मध्य प्रदेश शासन की ओर से कोई भी अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इस पर न्यायालय ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। ओबीसी पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुरोध पर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार फरवरी को निर्धारित कर दी। इस घटनाक्रम ने शासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
