Sakat Chauth Vrat: सकट चौथ के व्रत से जुड़े ये जरुरी नियम आपको पता होने चाहिए

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सनातन धर्म व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व है। सकट चौथ का व्रत काफी महत्वपूर्ण है। सकट चौथ व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश और सकट चौथ का व्रत माता सकट को समर्पित है। इस व्रत के दौरान भगवान गणेश और सकट माता की पूजा की जाती है।  माना जाता है कि इस दिन माताएं अपने संतान की कल्याण की कामना से व्रत करती हैं। हिंदू धर्म में कुछ व्रत निर्जला व कुछ व्रत फलाहकर किए जाते हैं। 
सकट चौथ में पानी पी सकते हैं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकट चौथ का व्रत करने से गौरी पुत्र श्रीगणेश प्रसन्न होते हैं और जीवन की सारी विघ्न-बाधाओं से रक्षा करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि सकट चौथ का व्रत निर्जला रखा जाता है। इस व्रत में पूरी तरह से पानी पीने की मनाही होती है। शाम को चंद्रदेव को अर्घ्य देने का बाद व्रत का पारण करना चाहिए।
व्रत पारण के समय क्या खाएं
सकट चौथ व्रत पारण करने के बाद कुछ जगहों पर महिलाएं कुछ भी नहीं खाती हैं, लेकिन कुछ जगहों पर महिलाएं मूंगफली व फलाहार किया करती है। इस दिन व्रत पारण के समय शकरकंद खाने का सबसे ज्यादा महत्व है।
भगवान गणेश को भोग किस चीज का लगाएं
सकट चौथ के दिन भगवान गणेश को तिलकुट का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही तिल से बनीं चीजें, तिल के लड्डू या तिल से बनी मिठाई का भोग जरुर लगाए जाता है।
व्रत कब खोल सकते हैं
सकट चौथ व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान है। इसलिए शाम को चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद सकट चौथ व्रत खोलते हैं।
इस दिन कौन-सा रंग पहनना चाहिए
सकट चौथ के दिन लाल और पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना है। इस दिन काले व सफेद रंग के वस्त्र भूलकर भी धारण ने करें। 

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